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बाबरी मस्जिद केस: आडवाणी ने दर्ज कराया अपना बयान, सभी आरोपों से किया इंकार

बाबरी विध्वंस केस में पूर्व उपप्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अपना बयान दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि साजिशन उन्हें फंसाया गया है.

News Nation Bureau | Edited By : Nitu Pandey | Updated on: 24 Jul 2020, 05:35:23 PM
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लाल कृष्ण आडवाणी (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली :  

बाबरी विध्वंस केस में पूर्व उपप्रधानमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी (LK Advani) ने अपना बयान दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि साजिशन उन्हें फंसाया गया है. पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अयोध्या का ढांचा गिराए जाने के मामले कि सुनवाई कर रही सीबीआई की विशेष कोर्ट के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना बयान दर्ज कराया. लालकृष्ण आडवाणी का बयान सुबह 11:30 बजे से 3:30 बजे तक बयान दर्ज किया गया.

शुक्रवार को बीजेप  नेता आडवाणी ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए अपना बयान दर्ज कराया. बृहस्पतिवार कोबीजेपीके ही वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिए अपना बयान अदालत में दर्ज कराया था . बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के मामले में इस समय आरोपियों के बयान दर्ज किये जा रहे हैं. सभी 32 आरोपियों के बयान सीआरपीसी की धारा-313 के तहत दर्ज हो रहे हैं.

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अयोध्या में मस्जिद छह दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने ढहायी थी. उनका दावा था कि जिस जगह मस्जिद थी, वहां राम का प्राचीन मंदिर हुआ करता था. राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व आडवाणी और जोशी ने किया था.बीजेपीनेता उमा भारती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह इस मामले में अपने बयान दर्ज करा चुके हैं. अदालत मामले की रोजाना सुनवायी कर रही है.

 उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुरूप उसे 31 अगस्त तक मामले की सुनवायी पूरी कर लेनी है . विशेष न्यायाधीश एस के यादव की अदालत में 92 वर्षीय आडवाणी के बयान दर्ज कराते समय उनके वकील विमल कुमार श्रीवास्तव, के के मिश्रा और अभिषेक रंजन मौजूद थे. सीबीआई के वकील ललित सिंह, पी चक्रवर्ती और आर के यादव भी मौजूद थे.

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बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी ने कल अदालत से कहा था कि वह बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में निर्दोष हैं और केन्द्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से उन्हें गलत तरीके से फंसाया है. उन्होंने आरोप लगाया था कि अभियोजन पक्ष की तरफ से इस मामले में पेश किये गये सबूत झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं.उल्लेखनीय है कि अयोध्या में छह दिसम्बर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था

First Published : 24 Jul 2020, 05:24:38 PM

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