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By Election : उपचुनाव से ठीक पहले सिंधिया खेमे के दो मंत्रियों ने दिया इस्‍तीफा

उत्तर प्रदेश की 7 विधान सभा सीटों पर उपचुनाव होगा. जिसके लिए बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस ने पूरा जोर लगाया है. वहीं, यह उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी और सीएम योगी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, हालांकि उत्तर प्रदेश में सरकार को लेकर कोई परेशानी नहीं है.

News Nation Bureau | Edited By : Shailendra Kumar | Updated on: 21 Oct 2020, 06:55:57 AM
Assembly By Election

उपचुनाव Live अपडेट (Photo Credit: न्यूज नेशन )

नई दिल्ली:

देश के कई राज्यों के विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले है. इन उपचुनाव विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होंगे. अगर बात करें उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल की तो सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश को लेकर है. क्योंकि यहां पहली बार एक साथ 28 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा. यह उपचुनाव तय करेगा की बीजेपी की शिवराज सिंह चौहान की सरकार रहेगी या कांग्रेस की कमलनाथ सरकार की वापसी होगी.

वहीं, उत्तर प्रदेश की 7 विधान सभा सीटों पर उपचुनाव होगा. जिसके लिए बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस ने पूरा जोर लगाया है. वहीं, यह उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी और सीएम योगी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, हालांकि उत्तर प्रदेश में सरकार को लेकर कोई परेशानी नहीं है. जिस पर इसका असर पड़ेगा, लेकिन प्रदेश में कुछ वक्त से बदले माहौल बीजेपी के खिलाफ जा सकता है. वहीं, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी के लिए 2022 के पहले जनता के मुड का अंदाजा होगा.

एमपी में निर्दलीय विधायक का बीजेपी को समर्थन


मध्य प्रदेश में विधानसभा के उप-चुनाव से पहले बीजेपी की ताकत में और इजाफा हो गया है, जब निर्दलीय विधायक केदार डावर ने बीजेपी को समर्थन देने का फैसला लिया. केदार डावर खरगोन जिले की भगवानपुरा से विधायक हैं. शिवराज सिंह चौहान सरकार के सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया के निवास पर केदार डावर ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया. इस मौके पर भदौरिया ने कहा कि डावर अपने क्षेत्र का विकास चाहते हैं. इससे पहले उन्होंने कमल नाथ सरकार को समर्थन दिया था, मगर उनके क्षेत्र में कोई विकास नहीं हुआ. डावर का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए उन्होंने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया है.

मध्य प्रदेश के दो मंत्री तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है. ऐसे में मुख्यमंत्री ने दोनों नेताओं के इस्तीफे स्वीकारते हुए राजभवन भेज दिए. बता दें कि दोनों ही नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुये थे. साथ ही इस बार के उपचुनाव भी लड़ रहे हैं.

पीएम मोदी की दूरदृष्टि ने कमजोर किया कोरोना का आघात : सिंधिया


भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि के कारण भारत में कोरोना की घातकता कमजोर रही है. वहीं इस बीमारी के कारण देश की अर्थ व्यवस्था पर पड़ा असर जल्दी ही कम होगा और आगामी एक साल में देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रगति आएगी.

मध्य प्रदेश में हो रहे विधानसभा के उप-चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों के समर्थन में चुनाव प्रचार के अभियान में सिंथिया सक्रिय हैं. इस दौरान उन्होंने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि का ही नतीजा है कि हमारे देश में कोरोना का असर अन्य देशों के मुकाबले कम रहा है.


मप्र के महिला अपराधों पर राज्य महिला आयोग ने चिंता जताई


मध्य प्रदेश में विधानसभा के उप-चुनाव के दौरान राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हमलावर हैं, वहीं राज्य महिला आयेाग ने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर चिंता जताई है. साथ ही सरकार को हिदायत दी है कि वह इस पर ध्यान दे. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा का कहना है कि, "प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव सामने हैं और दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान के चरम पर हैं. दोनों ही दल अपने अभियान में किसी प्रकार की कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहते हैं. ऐसे माहौल में सर्वाधिक असर प्रदेश की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर पड़ा है, जिस ओर सरकार का ध्यान बिल्कुल नहीं है."


पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को पार्टी से बाहर निकाले कांग्रेस : रामदास 


केंद्रीय सामजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने मध्य प्रदेश में बीजेपी की महिला प्रत्याशी इमरती देवी पर अभद्र टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से माफी मांगने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि, "कमलनाथ ने इमरती देवी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करके न सिर्फ उनका बल्कि सभी दलित महिलाओं का अपमान किया है. इसलिए उन्हें पूरे घटनाक्रम में तत्काल माफी मांगनी चाहिए." रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया(ए) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इस प्रकरण में हस्तक्षेप करना चाहिए और यदि कमलनाथ माफी नहीं मांगते तो उन्हें कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए. 


First Published : 21 Oct 2020, 06:55:57 AM

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