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कोरोना खतरे के बीच संकट में उद्धव ठाकरे की सरकार, राज्यपाल के रहमोकरम पर टिकी उम्मीदें

Mohit Raj Dubey | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 10 Apr 2020, 12:42:28 PM
Udhav Thackeray Corona Virus

गवर्नर पर टिका है उद्धव ठाकरे का राजनीतिक भविष्य. (Photo Credit: न्यूज स्टेट)

highlights

  • अब कोरोना संक्रमण संकट ने महाराष्ट्र में संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा कर दी है.
  • उद्धव को कोटे से एमएलसी बनाने की सिफारिश गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी से की गई.
  • हालांकि पेंच यह कि गवर्नर कोटे वाला विधान परिषद सदस्य गैर-राजनीतिक होना चाहिए.

मुंबई:  

महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना सरकार (Shivsena Government) शुरू से ही संकटों से घिरी हुई है. पहले पहल तो सूबे में दशकों की साथी बीजेपी (BJP) से साथ छोड़ नए गठबंधन को बनाने में तमाम तरह के समझौते करने पड़े. येन-केन-प्रकारेण उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) के नेतृत्व में सरकार बना भी ली, तो एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (Congress) ने मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे पर नाक में दम कर दिया. अब कोरोना संकट ने महाराष्ट्र में संवैधानिक संकट (Constitutional Crisis) की स्थिति पैदा कर दी है. राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. उन्हें 28 मई को मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद संभाले छह महीने पूरे हो जाएंगे. तब तक वे अगर किसी सदन के सदस्य नहीं चुने जाते हैं तो पद पर नहीं रह सकते. अब कैबिनेट ने उद्धव की कुर्सी बचाने के लिए उनको राज्यपाल (Governor) कोटे से एमएलसी बनाने की सिफारिश गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी से की है. हालांकि इसमें भी पेंच है, गवर्नर कोटे वाला विधान परिषद सदस्य गैर-राजनीतिक होना चाहिए. ऐसे में उद्धव ठाकरे के सामने खुद को गैर राजनीतिक पेश करना एक बड़ी चुनौती बन कर उभरी है.

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72 घंटे पहले एमएलसी चुनाव टला
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के खतरे और लॉकडाउन के चलते 72 घंटे पहले एमएलसी चुनाव टाल दिया गया था. इसके बाद से ही उद्धव ठाकरे की सीएम पद की कुर्सी पर संकट आ गया था. महाराष्ट्र सरकार की सिफारिश के बाद ये संकट छंटता जरूर नजर आ रहा है, लेकिन गेंद अब भी राज्यपाल के ही पाले में है. महाराष्ट्र में राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाली विधान परिषद की दो सीटें खाली हैं. इन्हीं में से एक सीट पर कैबिनेट ने उद्धव ठाकरे को नामित करने की सिफारिश राज्यपाल के पास भेजी है. अगर राज्यपाल सहमत हो जाते हैं तो उद्धव की कुर्सी बच जाएगी.

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मनोनयन के लिए गैर-राजनीतिक शख्स हो
हालांकि असल पेंच यहीं छिपा है. राज्यपाल कोटे की सीटों पर खेल, कला, विज्ञान, शिक्षा, साहित्य आदि क्षेत्रों से आने वाले विद्वानों को मनोनीत किया जाता है. ऐसे में उद्धव ठाकरे को सरकार किस क्षेत्र के तहत विधान परिषद में भेज रही है, इसे देखना होगा. यह राज्यपाल के ऊपर निर्भर करेगा कि सरकार के अनुरोध को मानें या नहीं. संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप कहते हैं कि राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाले एमएलसी सदस्यों के नामों की सिफारिश राज्य सरकार ही करती है. इसके बावजूद राज्यपालों का यह आग्रह रहता है कि जिन नामों की सिफारिश राज्य सरकार कर रही है, वे गैर राजनीतिक हों.

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उद्धव का फोटोग्राफी प्रेम बचा सकता है सीएम पद
वैसे अगर कला के क्षेत्र से नामांकन की बात आती है, तो उद्धव ठाकरे फोटोग्राफी के अपने शौक को ढाल बना सकते हैं. उद्धव को बचपन से ही फोटोग्राफी का शौक रहा है. वाइल्ड लाइफ और नेचर फोटोग्राफी उनके पसंदीदा विषय हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अपने मोबाइल फोन से कई बार फोटो खींचकर वे सोशल मीडिया पर डाल चुके हैं. यानी अगर गवर्नर कला क्षेत्र से किसी नाम का आग्रह करते हैं, तो भी उद्धव की दावेदारी पेश की जा सकती है और उनकी फोटोग्राफी उनके राजनीतिक करियर के लिए सहारा बन सकती है.

First Published : 10 Apr 2020, 12:42:28 PM

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