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सरकार और किसानों की वार्ता रही बेनतीजा, 22 जनवरी को होगी अगली बैठक

नए कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन आज 56वें दिन में प्रवेश कर गया है. कड़ाके की सर्दी में दिल्ली के तमाम बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान आंदोलनरत हैं.

News Nation Bureau | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 21 Jan 2021, 11:39:16 PM
Kisan Andolan

LIVE: कृषि कानूनों के मसले पर किसानों के साथ सरकार की वार्ता (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

नए कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन आज 56वें दिन में प्रवेश कर गया है. कड़ाके की सर्दी में दिल्ली के तमाम बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान आंदोलनरत हैं. इस बीच इस मसले का हल निकालने के लिए किसानों के साथ सरकार की बातचीत लगातार जारी है. अब तक 9 दौर की वार्ता हो चुकी है. हालांकि वो बेनतीजा रहीं. लेकिन कुछ उम्मीदों के साथ आज 10वें दौर की वार्ता किसानों और सरकार के बीच होने जा रही है. 

सरकार और किसानों की बैठक का ब्रेक हो गया है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है. किसानों ने एनआईए की नोटिस का विरोध जताया है. मंत्री जी ने कहा कि पता करेंगे. सरकार ने संशोधन का विषय रखा. किसानों ने की वापसी की मांग. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा से सरकार भाग रही है. 

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार जारी है. इस दौरान किसानों की मौत का सिलसिला भी बढ़ता जा रहा है. आज टिकरी बॉर्डर पर एक और बुजुर्ग किसान की मौत हो गई है. मृतक किसान की पहचान धन्ना सिंह के रूप में हुई है.

किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई पूरी हो गई है. 

भूषन ने कहा कि किसान आउटर रिंग रोड पर रहेंगे. सब शान्तिपूर्ण रहेगा. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि किसानों के वकील भूषण कह रहे हैं कि ट्रैक्टर परेड शांतिपूर्ण होगी, लेकिन हम कैसे विश्वास करें. 5000 ट्रैक्टर दिल्ली की सीमा में आ रहे है, वो सब नहीं जाएंगे. एक मुख्यमंत्री को उसकी सभा में जाने नहीं दिया गया. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये पूरी तरह से एक्यूजटिव के अधिकार का मसला है. उम्मीद है कि सब शांतिपूर्ण रहेगा.

केंद्र सरकार के साथ होने वाली 10वें दौर की वार्ता के लिए किसान नेता विज्ञान भवन पहुंच गए हैं. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया, 'हम बैठक और आंदोलन भी करेंगे. किसान यहां से वापस नहीं जाएगा, जब तक MSP पर कानून, 3 कानूनों की वापसी और स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू नहीं करेंगे.'

प्रशांत भूषण ने कहा कि किसान कानून में किसी बदलाव के पक्षधर नहीं हैं, वो क़ानून वापसी चाहते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि अभी तो कानून लागू भी नहीं है. लोकतांत्रिक प्रकिया में कोर्ट का भी रोल है. हम कानून निरस्त कर सकते हैं. भूषण ने कहा कि किसान लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बना रहे हैं. उन्हें डर है कि अगर वो फिलहाल उठ जाए और कल आपने कानून को वैधानिक तौर पर सही करार दिया और स्टे के आदेश को हटा लिया तो उनका क्या होगा.

CJI ने वकील प्रशांत भूषण से कहा कि सिर्फ ये कहने भर से आपके किसान संगठन कमेटी के सामने पेश नहीं होंगे, काम नहीं चलेगा. आप उन्हें शांतिपूर्ण समाधान के लिए समझाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमेटी बनाने का मकसद ही ये था कि वो दोनों पक्षों की बात सुने, उससे कोर्ट को अवगत कराए. कमेटी को कृषि क़ानून की वैधता पर फैसला नहीं लेना था. अब एक सदस्य ने इस्तीफा दे दिया. उनके जगह रिक्त हुए पद पर भरने की एप्लिकेशन पर नोटिस जारी करते हैं. 

सीजेआई ने कहा कि हम साफ कर चुके है कि कमेटी कोई कानून की वैधता पर फैसला नहीं लेने जा रही है, सिर्फ इस न्यायिक प्रकिया का एक हिस्सा है. जो लोग कमेटी के सदस्य हैं वो कृषि क्षेत्र के एक्सपर्ट हैं.

CJI - हमने लोकहित को देखते हुए दखल का फैसला लिया था. जनता की राय की अपनी अहमियत है पर इसका इस्तेमाल किसी को बदनाम करने के लिय नहीं होना चाहिए. हमें दुख है कि ये देखकर कि कैसे कमेटी के सदस्यों को लेकर बातें कही गई. कैसे इस सम्बन्घ में मीडिया रिपोर्टिंग की गई. 

सरकार से वार्ता के लिए किसान नेता विज्ञान भवन के लिए रवाना हो गए हैं. ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह भंगू ने कहा कि पहली बैठक में हमारे नेताओं से स्पष्ट कह दिया था कि अगली बैठक रखते हैं तो मन बना कर आएं कि कानून रद्द करना है और MSP पर कानून बनाने से नीचे कोई बात शुरू नहीं होगी. आज उम्मीद है कि कि सरकार ने मन बनाया होगा.

CJI ने कहा कि आप बेवजह आशंका जाहिर कर रहे हैं. क्या किसी सदस्य की अपनी कोई राय नहीं हो सकती. यहां तक कि जजों की भी अपनी राय होती है. अगर किसी ने कोई राय व्यक्त की है तो क्या वो पक्षपाती हो गया! आपको कमेटी के सामने पेश नहीं होना तो मत होइये, मगर किसी को यूं बदनाम मत कीजिए. आप कोर्ट की निष्ठा पर यूं सवाल खड़े मत कीजिए.

चीफ जस्टिस ने कमेटी के सदस्यों पर कुछ किसान संगठनों की आपत्ति पर नाराज़गी जाहिर की. 


 

प्रशांत भूषण ने ये साफ किया कि उनके किसान संगठन कमेटी के सामने पेश नहीं होंगे. वकील दुष्यत दवे ने इस पर ऐतराज जाहिर किया कि बिना उनकी मौजूदगी के उस दिन कोर्ट ने आदेश पास किया. चीफ जस्टिस ने कहा कि जब मामला सुनवाई के लिए लगा था,आपको पेश होना चाहिए था.

आज सुनवाई में प्रशांत भूषण और दुष्यन्त दवे भी उन किसान संगठनों की ओर से पेश हुए जिन्हें SC ने शुरुआत में पक्षकार बनाया था. वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि वो और दवे आठ किसान यूनियन की ओर से पेश हो रहे हैं. 


 

कोर्ट ने सरकार से कहा कि आप अपनी अर्जी वापस लें. कोर्ट इस पर कोई आदेश पास नही करेगा.

CJI की टिप्पणी - किसानों को मार्च करने की इजाज़त मिले या नहीं, ये पूरी तरह से पुलिस के अधिकार क्षेत्र का मसला है. पुलिस अपने हिसाब से फैसला ले. इसमें कोर्ट के दखल की ज़रूरत नहीं है. हम इसको लेकर कोई आदेश पास नहीं करेंगे.

दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू

कनाडा की संसद में एक बार फिर भारत में जारी किसानों के आंदोलन को लेकर आवाज उठी है. कनाडाई सांसद तनमनजीत सिंह देसी ने ट्वीट कर बताया, 'भारत के किसानों के विरोध के लिए हमारी चिंताओं के बारे में 100 से अधिक सांसदों ने पीएम को क्रॉस-पार्टी पत्र पर हस्ताक्षर किए. लेकिन अब वहां के अधिकारियों द्वारा डराने-धमकाने और उत्पीड़न की खबरें सुनाई देने लगी हैं. जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, संघ नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है.'


26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड को लेकर आज एक बार फिर किसानों और दिल्ली पुलिस के बीच बातचीत होगी.

भारतीय किसान यूनियन के नेता सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड करेंगे. हमारा लक्ष्य 5 लाख ट्रैक्टरों को परेड में शामिल करना है. पुलिस कह रही है कि दिल्ली की सीमा में परेड मत करो, लेकिन हम मानेंगे नहीं. आज सरकार के साथ बैठक में कोई बात नहीं बनेगी. केन्द्र सरकार हमारी बात नहीं मान रही हैं.

सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गुरु गोविंद सिंह के 'प्रकाश पर्व' पर अरदास की. एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह हमारे 10वें गुरु हैं. उन्होंने सिख पंथ की नीव रखी थी. उनकी कुर्बानी बहुत बड़ी है. आज हमारी खुशी का ठिकाना नहीं है.


कांग्रेस आज तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ कर्नाटक में राजभवन का घेराव करेगी.

तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान आज गणतंत्र दिवस से पहले गुरुग्राम में ट्रैक्टर रैली का 'पूर्वाभ्यास' करेंगे.

अब तक 9 दौर की वार्ता हुआ है, जिसमें कोई हल नहीं निकला. सरकार इन कानूनों को रद्द किए जाने की मांग पर अड़े हैं तो सरकार इन्हें वापस लेने के पक्ष में नहीं है.

किसानों और सरकार के बीच 10वें दौर की वार्ता दोपहर 2 बजे विज्ञान भवन में होगी.

First Published : 20 Jan 2021, 06:35:16 AM

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