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संघर्ष, गरीबी के बीच अफगान बच्चे कर रहे भोजन की भारी कमी का सामना

संघर्ष, गरीबी के बीच अफगान बच्चे कर रहे भोजन की भारी कमी का सामना

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 21 Nov 2021, 09:05:01 AM
Afghan children

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

काबुल: दुनिया भर के कई देशों में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आनंद के अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए विश्व बाल दिवस मनाया जाता है, मगर युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में कई बच्चों को अपने परिवारों को जीवित रहने में मदद करने के लिए सड़क पर काम करना पड़ता है।

14 वर्षीय मलिक ने शनिवार को समाचार एजेंसी सिन्हुआ को बताया, मैं स्कूल जाता था, लेकिन आजकल नहीं जाता, क्योंकि युद्ध और गरीबी ने हमें जकड़ लिया है और जीवित रहने के लिए मेरे पिता ने मुझे गाय चराने के लिए कहा है। उन्होंने दूध बेचकर परिवार का खर्च जुटाने के लिए एक गाय खरीदी है।

तीन साल के लिए स्कूल छोड़ने पर दुख व्यक्त करते हुए मलिक ने कहा कि उसके पिता बेरोजगार हैं और परिवार के बड़े बेटे के रूप में उसे आजीविका कमाने के लिए काम करना पड़ता है।

अपनी गाय चराने के अलावा, मलिक कुछ पैसे कमाने के लिए सड़क पर ग्राहकों के लिए चीजें बेचता है।

काम करने वाले लड़के ने कहा कि युद्ध उसकी गरीबी का मुख्य कारण है और पिछले चार दशकों के दौरान युद्ध में सब कुछ नष्ट हो गया।

एक प्राथमिक विद्यालय में पांचवीं कक्षा का छात्र अमीनुल्ला पोपलजई भी अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित है, क्योंकि उसे स्कूल से घर लौटने के बाद काम करना पड़ता है।

उसने कहा, मेरे वृद्ध पिता के पास नौकरी या आय का कोई साधन नहीं है, इसलिए मुझे अपने परिवार की मदद करने के लिए काम करना पड़ता है।

उसे यह भी डर है कि अगर उसके परिवार के खर्च का बोझ बढ़ गया तो उसे एक दिन स्कूल छोड़ना पड़ सकता है।

काबुल निवासी अजीज ने बताया, हमारे बच्चों को शिक्षा की जरूरत है और मैं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान के बच्चों को स्कूल जाने के लिए सहयोग देने का अनुरोध कर रहा हूं।

अजीज के अनुसार, कई अफगान बच्चों के घर में कमाने वाले नहीं हैं, इसलिए उन्हें अपने परिवार के लिए आजीविका कमाने के लिए आधे दिन स्कूल जाना पड़ता है और आधे दिन काम करना पड़ता है।

संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसियों के अनुसार, आज लाखों बच्चों सहित 2.2 करोड़ से अधिक अफगान भोजन की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्धग्रस्त देश को मानवीय सहायता की आपूर्ति में किसी भी तरह की देरी आने वाली सर्दियों में तबाही साबित हो सकती है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 21 Nov 2021, 09:05:01 AM

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