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दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से सिख दंगों की वजह से भारत रत्न वापस लेने के प्रस्ताव पर अब आम आदमी पार्टी ने सफाई दी है. पार्टी की तरफ से कहा गया है कि लिखित तौर पर जो प्रस्ताव स्पीकर के पास भेजा गया उसमें राजीव गांधी का नाम शामिल नहीं है. इसके साथ ही यह कहा गया है कि विधानसभा में पास किए गए प्रस्ताव में राजीव गांधी से जुड़ी बातों नहीं की गई है.
हालांकि सदन में प्रस्ताव पढ़ने वाले विधायक जरनैल सिंह ने राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने की मांग पूरे सदन के सामने प्रस्ताव के तौर पर पेश किया गया जिस पर उस वक्त ना तो विधासभा अध्यक्ष ने और ना ही किसी अन्य सदस्य ने कोई आपत्ति नहीं जताई.
आम आदमी पार्टी डैमेज कंट्रोल में क्यों जुटी ?
माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी के महागठबंधन में शामिल होने या फिर कांग्रेस से गठबंधन करने की उम्मीदों को झटका लग सकता है इसलिए आम आदमी पार्टी की तरफ से यह सफाई दी गई है. कुछ दिनों पहले ही दिल्ली की पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने आम आदमी पार्टी से गठबंधन की संभावनाओं से इनकार नहीं किया है.
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ऐसे में आम आदमी पार्टी की तरफ से राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने की मांग इस संभावित गठबंधन पर पानी फेर सकती है इसलिए आम आदमी पार्टी अब डैमेज कंट्रोल करने में लग गई है क्योंकि कांग्रेस पार्टी राजीव गांधी के नाम पर किसी से भी समझौता करेगी यह लगभग असंभव सा ही है.
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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के दिवंगत नेता राजीव गांधी से देश का सबसे बड़ा सम्मान 'भारत रत्न' वापस लेने की मांग केजरीवाल सरकार ने की है. इस मांग को लेकर दिल्ली विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया गया है जिसमें कहा गया है कि राजीव गांधी से भारत रत्न का सम्मान वापस ले लेना चाहिए.इस बात की जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने दी है. गौरतलब है कि इससे पहले भी आम आदमी पार्टी के नेता और वकील एचएस फुल्का और बीजेपी के सचिव आरपी सिंह ने राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लिए जाने की मांग की थी लेकिन उस वक्त इसे खारिज कर दिया गया था.
Source : News Nation Bureau