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35 फीसदी जनता ने माना, अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन खत्म करना सही फैसला नहीं : आईएएनएस सी वोटर ट्रैकर

35 फीसदी जनता ने माना, अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन खत्म करना सही फैसला नहीं : आईएएनएस सी वोटर ट्रैकर

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 10 Jul 2021, 09:45:01 AM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: आईएएनएस सी वोटर ट्रैकर के अनुसार, अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में अपने सैन्य मिशन को समाप्त करने को लेकर 35 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि यह इस समय को देखते हुए सही निर्णय नहीं है, जबकि 34 प्रतिशत ने इस निर्णय का समर्थन किया।

ट्रैकर ने पाया कि जैसे-जैसे अफगानिस्तान में अमेरिका का मिशन की समाप्ति की ओर आ रहा है 43 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि पिछले बीस वर्षों में अमेरिका के सैन्य मिशन के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति में सुधार हुआ है, जबकि 31 प्रतिशत ने कहा कि वे इस समंबंध में कुछ कह नहीं सकते।

ट्रैकर का नमूना आकार 1815 है ।

यह सर्वेक्षण उन रिपोर्टों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा है कि तालिबान अब अफगानिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहा है और कई लोग इस देश में गृहयुद्ध की भविष्यवाणी कर रहे हैं।

एक ओपीनियन पीस में, वाशिंगटन पोस्ट ने कहा, अब, यह त्रासदी कई निराशावादियों की कल्पना से भी अधिक तेजी से सामने आ रही है। हाल के हफ्तों में, तालिबान बलों ने एक राष्ट्रव्यापी हमले में दर्जनों जिलों पर कब्जा कर लिया है, कई प्रांतीय राजधानियों को घेर लिया है और काबुल में प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है।

अफगानिस्तान में तैनात शीर्ष अमेरिकी सैन्य कमांडर, जनरल ऑस्टिन एस मिलर ने गम्भीर शब्दों में चेतावनी दी कि गृह युद्ध निश्चित रूप से एक रास्ता है जिसकी कल्पना की जा सकती है, यह कहते हुए उन्होंने चेताया कि यह दुनिया के लिए एक चिंता का विषय होना चाहिए।

वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि यह कम से कम, बाइडन के लिए एक चिंता का विषय होना चाहिए, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से एक कठिन हालात विरासत में मिला है लेकिन इसे ठीक करने के बजाय अमेरिकी मिशन खत्म का विकल्प चुना गया। राष्ट्रपति को सेना की वापसी के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। आज के अफगानिस्तान को बनाने में संयुक्त राज्य अमेरिका ने दो दशक बिताए हैं। इसके बजाय, वह इस देश की दुर्दशा के प्रति उदासीन रहा है।

जैसे ही अमेरिकी सलाहकार और हवाई समर्थन हट रहा है, तालिबान द्वारा अफगान सेना की इकाइयों का सफाया किया जा रहा है, या अफगान सैनिक बिना लड़ाई के आत्मसमर्पण कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हताशा में, सरकार ने 1990 के दशक में देश को त्रस्त करने वाले अराजक संघर्ष और दस्युओं की वापसी को जोखिम में डालते हुए, जातीय मिलिशिया को फिर से संगठित करने के लिए आमंत्रित किया है।

वाशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि उस समर्थन के बावजूद भी सरकार शायद टिक न पाए। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक पिछले सप्ताह सामने आए अमेरिकी खुफिया समुदाय के आकलन में कहा गया है कि यह अमेरिकी प्रस्थान के छह से 12 महीनों के भीतर गिर सकती है।

अगर ऐसा होता है, तो न केवल अफगानों को खतरा होगा। खुफिया समुदाय और कांग्रेस द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, अल-कायदा देश में अपने ठिकानों को फिर से स्थापित कर सकता है। शरणार्थियों का पलायन शुरू हो सकता है जिससे पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश अस्थिर हो सकते हैं और वे यूरोप की सीमाओं पर जमा हो सकते हैं।

ईरान, चीन और रूस जैसे अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि इराक, ताइवान और यूक्रेन जैसे अमेरिकी सहयोगियों के लिए खड़े होने के लिए बिडेन के पास साहस की कमी है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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First Published : 10 Jul 2021, 09:45:01 AM

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