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Karnataka Budget 2026: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने 17वें राज्य बजट को पेश करते हुए एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिस पर व्यापक रूप से बहस छिड़ गई है. प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि वह 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है. सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए उठाया जा सकता है.
प्रस्ताव आते ही प्रतिक्रियाएं शुरू
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद अभिभावकों, शिक्षकों और राजनीतिक नेताओं के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इसे लागू करना आसान नहीं होगा.
शिक्षा क्षेत्र में इस प्रस्ताव का किया समर्थन
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु स्थित इनवेंचर अकादमी की मैनेजिंग ट्रस्टी और सीईओ नूराइन फजल का कहना है कि बच्चों में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सरकार को जल्द कदम उठाने की जरूरत है. उनके मुताबिक कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि यूजर्स लगातार स्क्रीन से जुड़े रहें. एल्गोरिदम आधारित फीड, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और अनंत स्क्रॉलिंग जैसे फीचर बच्चों को लंबे समय तक मोबाइल पर लगाए रखते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है.
बड़ी टेक कंपनियों पर भी उठाए सवाल
नूराइन फजल ने आगे यह भी कहा कि केवल बच्चों को तकनीक से दूर रखना समाधान नहीं है. जरूरी है कि बच्चों को डिजिटल साक्षरता और सही फैसले लेने की समझ भी दी जाए, ताकि वे तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकें. फजल ने बड़ी टेक कंपनियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने नाबालिगों के बीच सोशल मीडिया के प्रसार को रोकने के लिए पर्याप्त जिम्मेदारी नहीं दिखाई है.
कई विशेषज्ञों ने भी किया समर्थन
शिक्षा से जुड़े कई विशेषज्ञ भी इस कदम के समर्थन में हैं. उनका कहना है कि आज के बच्चे बहुत कम उम्र में ही इंटरनेट और सोशल मीडिया के संपर्क में आ जाते हैं. इससे वे कई बार ऐसे कंटेंट देखते हैं, जिसके लिए वे मानसिक रूप से तैयार नहीं होते. इसका असर उनके आत्मविश्वास और व्यवहार पर भी पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन का समय बच्चों के लिए असली दुनिया में अनुभव हासिल करने, लोगों से बातचीत करने और नई चीजें सीखने का होना चाहिए, न कि लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर बिताने का.
अभिभावकों की मिली-जुली राय
दूसरी ओर, अभिभावकों के बीच इस मुद्दे पर मिली-जुली राय देखने को मिल रही है. कुछ माता-पिता का मानना है कि सोशल मीडिया बच्चों को जरूरत से ज्यादा और बहुत जल्दी एक्सपोजर दे देता है, जिससे वे अपनी उम्र से ज्यादा परिपक्व व्यवहार करने लगते हैं. ऐसे में कुछ स्तर तक नियंत्रण जरूरी है.
कई बैन लगाने के विचार से सहमत नहीं
हालांकि, कुछ अभिभावक पूरी तरह से बैन लगाने के विचार से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. कई युवा सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाने, नई चीजें सीखने और करियर बनाने तक में सफल हुए हैं. इसलिए पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से कुछ सकारात्मक अवसर भी खत्म हो सकते हैं.
क्या बोले मंत्री संतोष लाड
सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर यह फैसला लागू होता है तो इसे कैसे लागू किया जाएगा. राज्य के मंत्री Santosh Lad ने कहा कि सरकार जल्द ही इस पर एक योजना तैयार करेगी. उन्होंने माना कि घरों के अंदर बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान नहीं है, लेकिन फिर भी यह मुद्दा गंभीर है और इसे लेकर कदम उठाने की जरूरत है.
विपक्ष ने की आलोचना
विपक्ष ने इस प्रस्ताव की आलोचना की है. भाजपा विधायक C. N. Ashwath Narayan ने इसे केवल सुर्खियां बटोरने वाला फैसला बताया. उनका कहना है कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस तरह के प्रतिबंध को लागू करने के लिए उसके पास व्यावहारिक योजना क्या है. बता दें कि कर्नाटक में शुरू हुई यह बहस अब वैश्विक चर्चा का हिस्सा बनती दिख रही है. दुनिया के कई देश भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया की उम्र सीमा तय करने और प्लेटफॉर्म्स पर सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रहे हैं.
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