मिडिल ईस्ट में महाजंग के बावजूद भारत में नहीं बढ़ेंगे तेल के दाम, सरकार ने बताया अपना 'बैकअप' प्लान

अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की घोषणा की, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी. हालांकि सरकार के अनुसार देश के पास करीब 8 हफ्तों का पर्याप्त कच्चा तेल और ईंधन भंडार उपलब्ध है.

अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने की घोषणा की, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी. हालांकि सरकार के अनुसार देश के पास करीब 8 हफ्तों का पर्याप्त कच्चा तेल और ईंधन भंडार उपलब्ध है.

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Ravi Prashant
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भारत में नहीं महंगा होगा क्रूड ऑयल Photograph: (NN)

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है. संघर्ष के चौथे दिन ईरान ने ‘Strait of Hormuz’ को बंद करने की घोषणा कर दी, जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई. यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र माना जाता है. इसके बंद होने की खबर से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है.

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28 फरवरी की उस दिन ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दीं, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर एक बहुत बड़ा और सीधा हमला बोल दिया. यह कोई मामूली हमला नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया 'टारगेटेड' अटैक था. इस हमले में ईरान के सबसे बड़े नेता, यानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई.

इस खबर के बाहर आते ही पूरे मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में आग लग गई. ईरान ने पलटवार करते हुए उन सभी देशों पर मिसाइलें दागीं, जहां-जहां अमेरिका के फौजी अड्डे (मिलिट्री बेस) मौजूद थे. साथ ही, इजराइल पर भी ताबड़तोड़ हमले किए गए. आज इस भयानक जंग को चार दिन बीत गए हैं और शांति की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है. 

जब दुनिया की 'नब्ज' पर ईरान ने रखा हाथ

इस जंग के बीच सबसे डराने वाली खबर तब आई, जब ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) को बंद करने का एलान कर दिया. यह समुद्र का एक छोटा सा हिस्सा है, लेकिन इसकी अहमियत इतनी ज्यादा है कि इसे दुनिया की अर्थव्यवस्था की 'नब्ज' कहा जाता है. जैसे ही यह रास्ता बंद हुआ, पूरी दुनिया के बाजारों में हड़कंप मच गया. भारत में भी लोग इस बात से डर गए कि कहीं अब पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान न छूने लगें. लोगों को लगा कि अगर वहां से तेल आना बंद हुआ, तो देश की रफ्तार थम जाएगी.

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और यह क्यों कीमती है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्र का एक बहुत ही संकरा रास्ता है, जिसकी चौड़ाई सिर्फ 33 किलोमीटर है. यह ओमान और ईरान के बीच स्थित है. आप इसे एक ऐसे पतले दरवाजे की तरह समझ सकते हैं, जहां से दुनिया का सबसे ज्यादा कच्चा तेल गुजरता है. हर दिन करीब 1.7 करोड़ से 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी छोटे से रास्ते से होकर दुनिया के अलग-अलग कोनों तक पहु्ंचता है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों की किस्मत इसी रास्ते से जुड़ी हुई है. अगर यह दरवाजा बंद हो जाए, तो इन देशों का तेल बाहर नहीं निकल पाएगा.

सिर्फ तेल ही नहीं, गैस का भी यही है रास्ता

होर्मुज का रास्ता सिर्फ कच्चे तेल के लिए ही नहीं, बल्कि गैस (LNG) के लिए भी बहुत जरूरी है. कतर, जो पूरी दुनिया को सबसे ज़्यादा गैस सप्लाई करने वाले देशों में से एक है, उसका भी इकलौता रास्ता यही है. अगर ईरान इस रास्ते को लंबे समय तक बंद रखता है, तो दुनिया के कई देशों में न सिर्फ गाड़ियां रुकेंगी, बल्कि घरों के चूल्हे और बिजली बनाने वाली फैक्ट्रियां भी ठप पड़ सकती हैं. इसे आप दुनिया के इंजन का 'फ्यूल पाइप' कह सकते हैं, जिसे ईरान ने फिलहाल मोड़ दिया है.

भारत के लिए क्यों बढ़ गई थी चिंता?

भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85% कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. हमारे लिए ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सबसे बड़ी प्राथमिकता है. भारत जो तेल मंगाता है, उसका लगभग आधा हिस्सा इसी होर्मुज के रास्ते से होकर हमारे बंदरगाहों तक पहुंचता है. जैसे ही रास्ता बंद होने की खबर आई, बाज़ार में यह डर फैल गया कि सप्लाई रुकने से पेट्रोल-डीजल के दाम अचानक बढ़ जाएंगे. इससे न सिर्फ ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, बल्कि खेती के लिए खाद से लेकर दुकानों में मिलने वाला हर सामान महंगा हो सकता है क्योंकि भारत में महंगाई सीधे तौर पर तेल की कीमतों से जुड़ी है.

भारत के पास है पर्याप्त स्टॉक

इन सबके बीच भारत सरकार की तरफ से एक बहुत ही राहत देने वाली जानकारी सामने आई है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल (Crude Oil) का 25 दिनों का स्टॉक जमा है. इतना ही नहीं, हमारे पास पेट्रोल और डीजल के रूप में भी 25 दिनों का अलग से भंडार (Refined Oil Stock) मौजूद है. अगर हम कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को मिलाकर देखें, तो भारत के पास कुल 8 हफ्तों यानी करीब दो महीने का पर्याप्त इंतजाम है. इसका मतलब है कि अगर कुछ हफ्तों तक सप्लाई में दिक्कत आती भी है, तो देश के पास जरूरत पूरी करने के लिए काफी तेल मौजूद है.

तेल के लिए हम सिर्फ एक रास्ते पर निर्भर नहीं

एक और जरूरी बात जो राहत देती है, वो यह है कि भारत का सारा तेल होर्मुज के रास्ते से नहीं आता. भारत अपनी जरूरत का केवल 40% तेल ही इस रास्ते से मंगवाता है. बाकी का 60% तेल दुनिया के दूसरे रास्तों और अन्य देशों से आता है. इसमें एक बड़ा हिस्सा रूस का भी है. भारत आज भी पिछले समझौतों के तहत रूस से लगातार कच्चा तेल खरीद रहा है और वो सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी है. इसलिए, सप्लाई पूरी तरह ठप होने का कोई खतरा फिलहाल नज़र नहीं आ रहा है।

 पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का अभी कोई इरादा नहीं

आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि सरकार की अभी पेट्रोल या डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. सरकारी सूत्रों ने साफ कर दिया है कि भारत की स्थिति अभी मजबूत है और हमारे पास एनर्जी (LPG और LNG) का भी अच्छा-खासा स्टॉक है. सरकार मिडिल ईस्ट के हालात पर पल-पल की नजर रख रही है और अगर जरूरत पड़ी, तो तेल मंगाने के लिए दूसरे विकल्पों या देशों से बातचीत भी की जा रही है. यानी अभी आपको पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें लगाने या घबराने की जरूरत नहीं है.

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. पूरी दुनिया की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर हैं. अगर यह जंग और खिंचती है, तो हो सकता है कि तेल की वैश्विक कीमतों में कुछ उछाल आए. लेकिन भारत जिस तरह से रूस से तेल मंगा रहा है और हमारे पास जो 8 हफ्तों का स्टॉक है, उसे देखते हुए हम काफी सुरक्षित स्थिति में हैं. सरकार का कहना है कि वे हर स्थिति के लिए तैयार हैं और देश में ईंधन की कमी नहीं होने दी जाएगी.

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