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ईरान हिंसा न्यूज Photograph: (X/ani)
ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. इजराइली अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्याएं जारी रहीं तो मिलिट्री एक्शन संभव है. सूत्रों के अनुसार United States आने वाले दिनों में ईरान पर स्ट्राइक कर सकता है. इसी कारण अमेरिका और Israel दोनों अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं.
मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर सवाल
इजराइल का आयरन डोम सिस्टम छोटी दूरी के रॉकेट्स को रोकने में सक्षम है, लेकिन ईरान की बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब मैक 15 की रफ्तार से मिसाइलें एक साथ दागी जाती हैं, तो इजराइल के एरो-3 और अमेरिका के THAAD जैसे एडवांस सिस्टम के लिए भी उन्हें पूरी तरह इंटरसेप्ट करना कठिन हो जाता है.
हिंसा में फंसे भारतीयीयों का रेस्क्यू मिशन
ईरान में बढ़ती अशांति का सीधा असर वहां रह रहे विदेशी नागरिकों पर पड़. भारत सरकार ने हालात को देखते हुए तुरंत रेस्क्यू मिशन शुरू किया. India के विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय छात्रों, तीर्थ यात्रियों और कारोबारियों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेज किए.
ईरान से लौटे भारतीयों ने बताया कि हिंसा, इंटरनेट बंदी और फ्लाइट कैंसिल होने के कारण हालात बेहद कठिन थे. कई दिनों तक परिवार से संपर्क नहीं हो सका. इसके बावजूद दूतावास और भारत सरकार की मदद से वे सुरक्षित स्वदेश लौट पाए.
ईरान में भारतीयों की क्या है स्थिति?
हिंसा से पहले के आंकड़ों के अनुसार ईरान की आबादी करीब 9 करोड़ है और वहां 10,700 से अधिक भारतीय रहते हैं. इनमें लगभग 3000 भारतीय छात्र हैं, जिनमें बड़ी संख्या कश्मीर के छात्रों की है. ये छात्र मुख्य रूप से तेहरान, मशहद, कुम और शिराज जैसे शहरों में मेडिकल और धार्मिक शिक्षा के लिए रह रहे थे.
नागरिकों का धन्यवाद
स्वदेश लौटे भारतीय नागरिकों ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi का आभार जताया. नागरिकों ने कहा कि संकट के समय सरकार ने तेज कार्रवाई करते हुए फ्लाइट्स की व्यवस्था की और सभी को सुरक्षित वापस लाया.
हेल्पलाइन नंबर जारी
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईरान में बदलते हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. भारतीय दूतावास ने आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और 24 घंटे सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. सरकार का संदेश साफ है कि दुनिया के किसी भी कोने में संकट में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना उसकी प्राथमिकता है.
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