रेलवे की बड़ी उपलब्धि: पश्चिम रेलवे में KAVACH 4.0 का सफल कमीशनिंग

लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करना अब पहले से ज़्यादा सुरक्षित होने जा रहा है क्युकी जिस KAVACH 4.0 के कमीशनिंग का इंतज़ार था वो ख़त्म हो चुका है। पश्चिम रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में KAVACH 4.0 परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करना अब पहले से ज़्यादा सुरक्षित होने जा रहा है क्युकी जिस KAVACH 4.0 के कमीशनिंग का इंतज़ार था वो ख़त्म हो चुका है। पश्चिम रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में KAVACH 4.0 परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

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Pankaj R Mishra
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Indian Railway

लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करना अब पहले से ज़्यादा सुरक्षित होने जा रहा है क्युकी जिस KAVACH 4.0 के कमीशनिंग का इंतज़ार था वो ख़त्म हो चुका है। पश्चिम रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में KAVACH 4.0 परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इस परियोजना को 397 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। नागदा–वडोदरा–सूरत–विरार–मुंबई सेंट्रल सेक्शन के रेल मार्ग पर KAVACH 4.0 सुरक्षा प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसी योजना के तहत वडोदरा–सूरत–विरार के बीच लगभग 344 किलोमीटर लंबे सेक्शन में कावच का काम पूरा कर लिया गया है और 30 जनवरी 2026 को इस हिस्से में सिस्टम को औपचारिक रूप से चालू कर दिया गया।

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क्या है KAVACH और क्यों है यह गेम-चेंजर ?

KAVACH एक आधुनिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो ट्रेन परिचालन को अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय भूलों से होने वाले हादसों को कम करना है। यह सिस्टम सिग्नल पासिंग एट डेंजर, ओवरस्पीडिंग और हेड-ऑन व रियर-एंड टकराव को रोकने में सक्षम है। इसके अलावा लेवल क्रॉसिंग पर ऑटो व्हिसलिंग और खराब मौसम या कोहरे की स्थिति में कैब के अंदर सिग्नल रिपीट करने जैसी सुविधाएँ भी देता है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि KAVACH 4.0 पूरी तरह भारत में तैयार तकनीक है। इसे किसी विदेशी कंपनी से नहीं खरीदा गया, इसी वजह से यह सिस्टम भारतीय हालात, ट्रैफिक और मौसम के अनुसार बेहतर तरीके से काम करता है। वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने जानकारी देते हुए न्यूज़ नेशन को बताया की KAVACH की लागत यूरोप में इस्तेमाल होने वाले ETCS जैसे सुरक्षा सिस्टम के मुकाबले काफी कम है, यानी कम खर्च में ज्यादा सुरक्षा मिलती है। यही कारण है कि यह तकनीक न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि भारतीय रेलवे के लिए व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान भी है।

जटिल तकनीक, तेज़ रफ्तार और भविष्य की तैयारी

वडोदरा–विरार सेक्शन पर कावच लागू करने के लिए हर स्टेशन और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सेक्शन की अलग योजना तैयार की गई। ट्रैक पर 8,000 से अधिक RFID टैग लगाए गए, 57 रेडियो टावर खड़े किए गए और पूरे रूट में OFC केबल बिछाई गई। स्टेशनों, लेवल क्रॉसिंग और इंजनों में अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए तथा व्यापक ट्रायल और टेस्टिंग की गई। फिलहाल WAP-7 इंजनों पर कावच सक्षम है और पश्चिम रेलवे में अब तक 364 लोकोमोटिव्स इससे लैस हो चुके हैं। आने वाले महीनों में पूरे BG रूट पर कवच लागू करने की दिशा में काम तेज़ी से जारी है।

इस परियोजना पर जनवरी 2023 में वडोदरा–सूरत–विरार सेक्शन पर काम शुरू हुआ और 30 जनवरी 2026 को 344 किलोमीटर लंबे इस खंड में कावच सिस्टम का सफल कमीशनिंग कर दिया गया। इससे पहले दिसंबर 2025 में वडोदरा–अहमदाबाद सेक्शन पर कावच लागू किया जा चुका है। अब तक पश्चिम रेलवे के कुल 435 रूट किलोमीटर में यह अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली चालू हो चुकी है।

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