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ai summit
राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी से 'India AI Impact Summit 2026' की शुरुआत हो गई है. 20 फरवरी तक चलने वाला यह प्रोग्राम दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को तय करने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. खास बात यह है कि यह अपनी तरह का पहला ऐसा ग्लोबल समिट है, जिसकी मेजबानी 'ग्लोबल साउथ' का कोई देश (भारत) कर रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब तकनीक की दुनिया में विकासशील देशों की आवाज भी मजबूती से सुनी जाएगी.
110 देशों के प्रतिनिधि और 20 बड़े नेता शामिल
इस समिट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 110 से ज्यादा देशों और 30 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने हिस्सा लिया है. दिल्ली में इस वक्त दुनिया के करीब 20 देशों के बड़े नेता और 45 मंत्री मौजूद हैं. इसके अलावा तकनीक के जानकार, रिसर्चर और बड़ी कंपनियों के लीडर्स भी यहाँ जुटे हैं. ये सभी मिलकर इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि कैसे AI का इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से समाज की भलाई के लिए किया जा सकता है.
तीन 'सूत्र' और सात 'चक्र' पर टिकी है नजर
भारत ने इस समिट को और भी खास बनाने के लिए इसे तीन मुख्य स्तंभों यानी "सूत्रों" पर आधारित किया है. लोग (People), धरती (Planet) और तरक्की (Progress). इसका सीधा मतलब है कि तकनीक ऐसी हो जो इंसानों के हक की रक्षा करे, पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए और आर्थिक मजबूती लाए.
इन्हीं बातों को जमीन पर उतारने के लिए इसे सात अलग-अलग हिस्सों या "चक्रों" में बांटा गया है. इनमें इंसानों की स्किल बढ़ाना, विज्ञान को तेज करना, आर्थिक विकास, सभी को बराबरी से संसाधन देना और सुरक्षित AI जैसे जरूरी विषय शामिल हैं. हर विषय पर अलग-अलग देशों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है ताकि हर फैसले में सबकी राय शामिल हो.
सुरक्षा से आगे अब विकास की बारी
AI को लेकर चर्चा साल 2023 में ब्रिटेन (Bletchley Park) से शुरू हुई थी, जहां इसके खतरों पर बात हुई थी. इसके बाद दक्षिण कोरिया और फ्रांस (2025) में भी मीटिंग्स हुईं. अब 2026 में भारत इसे एक कदम आगे ले गया है. भारत मंडपम में हो रही चर्चाओं का मुख्य केंद्र यह है कि कैसे AI के जरिए गरीबी दूर की जाए, सबको नए जमाने के हुनर सिखाए जाएं और तकनीक को हर किसी की पहुंच में लाया जाए. भारत का यह कदम दुनिया भर की डिजिटल नीतियों को बदलने की ताकत रखता है.
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