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सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका Photograph: (ANI)
Unnav Rape Case: उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका खारिज कर दी. जिसपर पीड़िता ने राहत व्यक्त की. सोमवार को न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पीड़िता ने कहा कि, "मैं आज सर्वोच्च न्यायालय गई थी. जब कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, तब मैं अदालत में मौजूद थी. मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं. मुझे इस बात की संतुष्टि है कि न्यायाधीश ने सुनवाई को जल्द से जल्द तीन महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है."
पीड़िता ने कहा कि, मेरे पिता वापस नहीं आएंगे. उनके भाइयों, अतुल सिंह सेंगर और जयदीप सिंह सेंगर ने मेरे पिता की हत्या की. वे इलाज के लिए जेल से बाहर हैं. इस मामले में शामिल सभी पुलिस अधिकारी भी रिहा हैं."
#WATCH | Delhi: The Supreme Court of India rejected a bail plea filed by expelled BJP leader Kuldeep Singh Sengar in the custodial death case of the Unnao rape survivor's father.
— ANI (@ANI) February 9, 2026
A victim says, "I went to the Supreme Court today. I was in the court when the judge gave his… pic.twitter.com/Zz3X8Fkos2
उन्नाव रेप पीड़िता ने आगे कहा कि, "जहां तक ​​कुलदीप सिंह सेंगर का सवाल है, उसने मेरे साथ जघन्य अपराध किया है. उसने मेरा बलात्कार किया है. मैं इसे कैसे साबित कर सकती हूं? क्या मैं जीवित हूं? क्या मुझे यह सब करना होगा?" पीड़िता ने कहा कि वह आठ साल से अपने साथ हुए हमले को साबित करने के लिए लड़ रही है. पीड़िता ने कहा कि, अगर निर्भया की तरह उसकी भी मृत्यु हो जाती, तो उसकी पीड़ा पर विश्वास किया जाता. उसने सर्वोच्च न्यायालय से अपने पिता के लिए न्याय दिलाने की अपील की और कुलदीप सिंह सेंगर को मृत्युदंड देने की मांग की ताकि उसके पिता की आत्मा को शांति मिल सके.
'निर्भया की तरह मेरी मौत हो जाती तो सब करते यकीन'
उन्नाव रेप पीड़िता ने कहा कि, "अगर निर्भया की तरह मेरी भी मृत्यु हो जाती, तो सब मान लेते कि मेरे साथ रेप हुआ था. मैं जीवित हूं. मेरे साथ जो हुआ उसे साबित करने में सालों लग गए. मैं आठ साल से संघर्ष कर रही हूं. आज भी मुझे यह साबित करना है कि मेरे साथ बलात्कार हुआ था. उसकी बेटी ने कहा कि यह एक सामान्य दुर्घटना थी. मुझे नहीं पता था कि दुर्घटना सामान्य थी या नहीं. मैं वेंटिलेटर पर थी. मैंने सर्वोच्च न्यायालय से अपने पिता के लिए न्याय दिलाने का अनुरोध किया है. उन्हें फांसी दी जानी चाहिए ताकि मेरे पिता की आत्मा को शांति मिल सके और उन्हें न्याय मिल सके."
तीन महीने के भीतर सुनवाई का किया था अनुरोध
बता दें कि इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने और जमानत की याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई और तीन महीने के भीतर फैसला करने का अनुरोध किया था. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने हाई कोर्ट को मामले की शीघ्र सुनवाई करने का निर्देश देते हुए कहा, "हम इस मामले को हाई कोर्ट से अपील की सुनवाई और फैसला करने का अनुरोध करने के लिए उपयुक्त मानते हैं, लेकिन तीन महीने से अधिक समय में नहीं."
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