'राष्ट्रपति के लिए बने वॉशरूम में पानी नहीं था, रास्ते में कूड़ा था', गृह मंत्रालय ने बंगाल मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर बंगाल के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है. पश्चिम बंगाल के सीएस से मंत्रालय ने चार मुद्दों पर जवाब मांगा है.

गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर बंगाल के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है. पश्चिम बंगाल के सीएस से मंत्रालय ने चार मुद्दों पर जवाब मांगा है.

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Jalaj Kumar Mishra
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Home Ministry Asks report from bengal CS over President Protocol Controversy

President Murmu (X@ANI)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे में प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करने के मामले में केंद्र सरकार ने प्रदेश के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है. सूत्रों की मानें तो गृह सचिव ने रिपोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी तक नहीं था. प्रशासन ने उनके आगमन के लिए जो रास्ता चुना, वह कचरे से भरा हुआ था. अधिकारियों की मानें तो आज गृहमंत्रालय को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए थे. 

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दरअसल, सात मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू आदिवासी 

पश्चिम बंगाल में नौवें इंटरनेशनल संथाल कॉन्फ्रेंस आयोजित हुआ था. ये हर साल होने वाला एक कॉन्फ्रेंस था, जो सिलिगुड़ी के बिधाननगर में होना था. इसी में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू को निमंत्रण भेजा गया था. हालांकि, कार्यक्रम से पहले सुरक्षा सहित अन्य कारणों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कार्यक्रम को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया. कार्यक्रम स्थल बदलने पर राष्ट्रपति मुर्मू ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि बंगाल सरकार आदिवासियों का भला ही नहीं चाहती है. उन्होंने कहा कि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री मुझे रिसीव करने के लिए आया. मुझे नहीं पता कि ममता मुझसे नाराज हैं या फिर नहीं. वैसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आप सभी ठीक रहें.

राष्ट्रपति बोलीं- ममता मेरी छोटी बहन जैसीं

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं. मैं भी बंगाल की बेटी हीं हूं. अगर कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो बेहतर होता. वहीं बहुत जगह है, बहुत सारे लोग आ सकते थे. लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां मीटिंग की इजाजत क्यों नहीं दी गई. राष्ट्रपति ने कहा कि गोशाईपुर में जगह कम होने की वजह से बहुत सारे लोग कार्यक्रम में नहीं आ पाए. कार्यक्रम ऐसी जगह रखा गया, जहां लोगों का पहुंचना बहुत मुश्किल था. ऐसा लग रहा है कि आदिवासी समुदाय के लोगों को कार्यक्रम में आने से रोका गया है. राष्ट्रपति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा लग रहा था, जैसे कुछ लोग इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस को नहीं होने देना चाहते थे. शायद कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि संथाल समुदाय आगे बढ़े और मजबूत बने. 

इन 4 मुद्दों पर केंद्र ने मांगा जवाब 

  1. राष्ट्रपति को रिसीव करने और विदा करने के लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक मौजूद क्यों नहीं थे?
  2. राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी नहीं था.
  3. प्रशासन ने जो रास्ता चुना था, वह कचरे से भरा था.
  4. दार्जिलिंग के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट इसके लिए जिम्मेदार हैं.

प्रेसिडेंट का पद पॉलिटिक्स से ऊपर- पीएम मोदी

राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि जो लोग डेमोक्रेसी को मजबूत बनाने में यकीन रखते हैं और आदिवासी समुदाय इससे बहुत दुखी हैं. उन्होंने कहा कि प्रेसिडेंट का पद पॉलिटिक्स के ऊपर होता है. हमेशा इस पद की गरिमा बनी रहनी चाहिए. उम्मीद करता हूं कि पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस को होश आएगा.

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