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प्रतिकात्मक फोटो (फाइल फोटो)
IMD Heat Alert: फरवरी 2026 जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है धूप में तपिश बढ़ती जा रही है.सोमवार को एनसीआर में अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा.अब 10 फरवरी से 15 फरवरी के बीच तापमान धीरे-धीरे और बढ़ेगा.मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 15 फरवरी तक अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा.
इसके बाद फरवरी के आखिरी हफ्ते में 25 से 28 फरवरी के बीच तापमान बढ़ेगा, जो 25 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है.जानकारी के अनुसार इस साल 2026 में भारत में आने वाली गर्मी काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है, लेकिन शुरुआत सामान्य से थोड़ी राहत वाली और बाद में फिर तेज तपिश वाली हो सकती है.
08 और 09 फरवरी 2026 के लिए मौसम की चेतावनी#WeatherUpdate#WesternDisturbance#Rainfall#Snowfall#Temperature#DenseFogWarning#HimalayanWeather@moesgoi@airnewsalerts@DDNational@ndmaindia@ICRER_MHApic.twitter.com/bXCC4ttlc0
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कई इलाकों में बारिश और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश
मौसम विभाग और विभिन्न क्लाइमेट मॉडल्स के शुरुआती अनुमानों के आधार पर फरवरी के अंत से अप्रैल तक तापमान औसत से ऊपर लेकिन ज्यादा कठोर नहीं रहेगा.बताया जा रहा है कि देश के दक्षिण और पूर्वी हिस्सों के कई इलाकों में बारिश और गरज-चमक के साथ हल्की राहत मिल सकती है.
मई के मध्य में बड़े पैमाने पर हीटवेव्स और तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है
मौसम विभाग के अनुसार मई से जून के पहले हिस्से तक स्थिति बदल जाएगी.एल नीनो की ओर बढ़ते संकेतों से मौसम सूखा और गर्म हो जाएगा, जिससे मई के मध्य में बड़े पैमाने पर हीटवेव्स (तेज लू) पड़ने की संभावना है.अनुमान है कि देश के उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है.
दैनिक मौसम परिचर्चा (08.02.2026)
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पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 9 से 11 फरवरी के दौरान पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में छिटपुट से व्यापक वर्षा/बर्फबारी की संभावना है।
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एल नीनो और मानसून के कमजोर होने से बढ़ेगा तापमान
बता दें एल नीनो, मानसून के कमजोर होने और ग्लोबल वार्मिंग के चलते तापमान बढ़ेगा.जानकारी के अनुसार एल नीनो को समझें तो जब प्रशांत महासागर में खासकर दक्षिण अमेरिका (पेरू, इक्वाडोर) के पास जो समुद्र का पानी होता है वो सामान्य से अचानक काफी गर्म हो जाता है तो उसे मौसम वैज्ञानिक एल नीनो कहते हैं.मौसम में इस बदलाव के बाद हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उल्टी दिशा में चलने लगती हैं.गर्म पानी वापस पूर्व की तरफ (दक्षिण अमेरिका के पास) जमा हो जाता है.
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