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GST Tax Slab Photograph: (News Nation)
GST Tax Slab: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ विवाद और महंगाई की मार के बीच मोदी सरकार आम लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है. इस बार राहत सीधे आपकी जेब से जुड़ी है. देश में बड़ा जीएसटी सुधार यानी जीएसटी 2.0 आने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 15 अगस्त को लाल किले से इसका ऐलान किया था. जिसके बाद से लगातार नए अपडेट सामने आ रहे हैं. खबर है कि मीठे और बेहद लोकप्रिय पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स जैसे चॉकलेट्स, फ्लेक्स, पेस्ट्री और आइसक्रीम पर टैक्स घट सकता है. फिलहाल इन चीजों पर 18% जीएसटी लगता है. उन्हें 5% टैक्स स्लैब में शामिल किया जा सकता है.
किन चीजों के गिरेंगे दाम
अगर यह प्रस्ताव अगले हफ्ते जीएसटी काउंसिल की बैठक में मंजूर हो जाता है तो इन चीजों की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी. इससे बच्चों से लेकर युवाओं तक सबके पसंदीदा चॉकलेट अब पहले से सस्ते होंगे. पेस्ट्री का दाम घटेगा. आइसक्रीम जेब पर हल्की पड़ेगी और नाश्ते में पसंद किए जाने वाले फ्लेक्स भी किफायती हो जाएंगे. यह बदलाव सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि सीधे तौर पर महंगाई के दबाव को कम करने का काम करेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स की मुताबिक आमतौर पर बड़े पैमाने पर खरीदे जाने वाले खाद्य पदार्थों पर टैक्स कम करने से लोगों की जेब पर बोझ घटेगा और महंगाई की मार कुछ हद तक हल्की होगी. गौरतलब है कि 18% टैक्स स्लैब में आने वाली चीजें जीएसटी राजस्व में बड़ी हिस्सेदारी रखती है. इसका मतलब है कि इन पर टैक्स घटाने से सरकार के खजाने पर असर जरूर पड़ेगा. वित्त मंत्रालय के सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार टैक्स स्लैब में इस तरह का बदलाव केंद्र और राज्य सरकारों की आय पर असर डाल सकता है.
सालाना करीब ₹400 करोड़ के राजस्व नुकसान की आशंका
अनुमान लगाया जा रहा है कि सालाना करीब ₹400 करोड़ के राजस्व नुकसान की आशंका है. हालांकि सरकार का मानना है कि टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाना और जनता को राहत देना ज्यादा जरूरी है. 3 और 4 सितंबर को दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक है. तो दिवाली से पहले आपकी टेबल पर सस्ते चॉकलेट पेस्ट्री आइसक्रीम नजर आ सकते हैं. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर ही साफ कहा था कि दिवाली से पहले जीएसटी में बड़ा सुधार किया जाएगा. उनके मुताबिक मौजूदा जीएसटी दरों की समीक्षा की जाएगी और टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाया जाएगा. यह कदम महंगाई को काबू में लाने और रोजमर्रा की चीजें खरीदने वाले आम उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका फायदा सिर्फ मेट्रो शहरों के लोगों को ही नहीं बल्कि छोटे शहरों कस्बों में रहने वाले उपभोक्ताओं को भी मिलेगा. जिससे त्यौहार के सीजन में आम लोगों की जेब पर असर कम पड़ सकता है.