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पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राज्यपाल सीवी आनंदा बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है. बताया जा रहा है कि इस्तीफा भेजते समय वह दिल्ली में मौजूद थे. राज्यपाल के अचानक इस्तीफे ने राज्य की राजनीति में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है. खासतौर पर इसलिए क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा किसी भी समय हो सकती है. ऐसे में यह फैसला राजनीतिक गलियारों में बड़ी घटना माना जा रहा है.
चुनाव से पहले आया बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल पहले से ही गरम है. उम्मीद की जा रही है कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है. ऐसे संवेदनशील समय में राज्यपाल का इस्तीफा देना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में यह घटनाक्रम राज्य की सियासत को नई दिशा दे सकता है.
राज्यपाल संवैधानिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं और चुनाव के दौरान भी प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर उनकी नजर रहती है. इसलिए उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है.
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया आई सामने
राज्यपाल के इस्तीफे की खबर सामने आते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया भी सामने आई. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फैसले को लेकर टिप्पणी की.
मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में इसे एक “चौंकाने वाला फैसला” बताया. हालांकि उन्होंने इस फैसले के पीछे की वजहों को लेकर ज्यादा विस्तार से कुछ नहीं कहा. लेकिन उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और भी तेज हो गई है.
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी अटकलें
राज्यपाल के इस्तीफे के बाद अब कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी चुनावों के मद्देनजर लिया गया हो सकता है, जबकि कुछ इसे प्रशासनिक या व्यक्तिगत कारणों से जोड़कर देख रहे हैं.
हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इस्तीफे के पीछे की सटीक वजह स्पष्ट नहीं की गई है. राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी आने का इंतजार किया जा रहा है.
और भी राज्यपाल और उपराज्यपाल दे सकते हैं इस्तीफा
सूत्रों की मानें अभी और भी राज्यपालों और उपराज्यपालों के इस्तीफे आ सकते हैं और इसके साथ ही नई नियुक्ति की सूची भी सरकार की ओर से जारी की जा सकती है. अब देखना होगा कि ये राज्यसभा चुनाव से पहले आती है या फिर उसके बाद. चूंकि पश्चिम बंगाल में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, इसलिए नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार जल्द फैसला ले सकती है.
फिलहाल राज्यपाल के इस्तीफे ने चुनाव से पहले ही पश्चिम बंगाल की राजनीति को और ज्यादा गर्मा दिया है. आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का राजनीतिक असर किस तरह सामने आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
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