'सॉरी पापा' और मंदिर वाली घर, क्या उन तीनों बहन को पता था कि वो कभी वापस नहीं आएंगी, आखिर क्या है सच?

गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या का मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए पहेली बन गया है. मोबाइल छीने जाने, कोरियन गेम के प्रभाव और पारिवारिक परिस्थितियों जैसे कई पहलुओं की जांच चल रही है. सुसाइड नोट में लिखे शब्द सॉरी पापा ने भी कई सवाल खड़े किए हैं.

गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या का मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए पहेली बन गया है. मोबाइल छीने जाने, कोरियन गेम के प्रभाव और पारिवारिक परिस्थितियों जैसे कई पहलुओं की जांच चल रही है. सुसाइड नोट में लिखे शब्द सॉरी पापा ने भी कई सवाल खड़े किए हैं.

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Ravi Prashant
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गाजियाबाद क्राइम न्यूज़ Photograph: (Gemini AI)

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला लगातार जटिल होता जा रहा है. इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है, बल्कि पुलिस के सामने भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर तीनों बहनों ने एक साथ इतना बड़ा कदम क्यों उठाया. क्या इसके पीछे ऑनलाइन गेमिंग का असर था या फिर पारिवारिक कलह.

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कोरियन कल्चर से थी तीनों प्रभावित

पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें पिछले करीब तीन साल से लगातार ऑनलाइन गेम खेल रही थीं. परिवार का आरोप है कि बच्चियां कोरियन गेम और कोरियन कल्चर से बेहद प्रभावित थीं. पिता के मुताबिक बेटियां बार-बार कोरिया जाने की बात करती थीं. जब घरवालों ने मोबाइल फोन इस्तेमाल और गेम खेलने से मना किया, तो बच्चियां मानसिक रूप से परेशान हो गईं. इसी तनाव में उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. हालांकि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कौन सा गेम था और क्या उसमें किसी तरह का चैलेंज या मानसिक दबाव शामिल था.

सुसाइड नोट में सॉरी पापा क्यों

घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में लिखा सॉरी पापा जांच का अहम बिंदु बना हुआ है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या बच्चियां अपने किसी फैसले को लेकर अपराधबोध में थीं या फिर उन्हें लगा कि वे अपने पिता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाईं. नोट की हैंडराइटिंग, भाषा और शब्दों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण भी कराया जा रहा है.

पिता ने की थी दो शादियां

जानकारी के मुताबिक बच्चियों के पिता ने दो शादियां की थीं और दोनों पत्नियां सगी बहनें हैं. दूसरी पत्नी से तीन बच्चे और पहली पत्नी से दो बच्चे हुए. जिन तीन बहनों ने आत्महत्या की, उनमें दो दूसरी पत्नी की बेटियां थीं, जबकि एक पहली पत्नी की बेटी थी. सभी एक ही घर में रहते थे. पुलिस यह भी देख रही है कि कहीं पारिवारिक संरचना और आपसी संबंधों का बच्चियों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर तो नहीं पड़ा.

पिछले कई सालों से नहीं जा रही थी स्कूल

तीनों बहनें पिछले दो साल से स्कूल नहीं जा रही थीं. लॉकडाउन के बाद उनका पढ़ाई से जुड़ाव टूट गया था. परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति और पढ़ाई में पिछड़ना भी एक कारण बताया जा रहा है. इसके साथ ही परिवार बेहद सीमित सामाजिक जीवन जीता था. बच्चियां न तो बाहर खेलती थीं और न ही सोसाइटी के अन्य बच्चों से मेलजोल रखती थीं.

आत्महत्या का तरीका सोचने वाला

तीनों बहनों ने फ्लैट के मंदिर वाले कमरे को आत्महत्या के लिए चुना. वहां की खिड़की से एक के बाद एक नीचे छलांग लगाई गई. पड़ोसियों के मुताबिक तीनों काफी देर तक बालकनी में थीं. एक बच्ची कूदने की कोशिश कर रही थी, जबकि बाकी दो उसे रोकने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन संतुलन बिगड़ने से तीनों नीचे गिर गईं. फिलहाल पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है. मोबाइल डेटा, गेमिंग हिस्ट्री, पारिवारिक बयान और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को जोड़कर सच तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

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