"झूठ बर्दाश्त नहीं...ऐसी चीजें नहीं दिखानी चाहिए जो अपनी नहीं हैं", गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद पर सख्त आईटी सचिव एस. कृष्णन

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'AI इम्पैक्ट समिट 2026' में गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग 'Orion' विवादों में आ गया है. इसे यूनिवर्सिटी का अपना आविष्कार बताया गया था, लेकिन जांच में यह चीन की कंपनी का निकला. विवाद बढ़ने पर सरकार ने यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटवा दिया और आईटी सचिव ने सख्त हिदायत जारी की है.

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'AI इम्पैक्ट समिट 2026' में गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग 'Orion' विवादों में आ गया है. इसे यूनिवर्सिटी का अपना आविष्कार बताया गया था, लेकिन जांच में यह चीन की कंपनी का निकला. विवाद बढ़ने पर सरकार ने यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटवा दिया और आईटी सचिव ने सख्त हिदायत जारी की है.

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Ravi Prashant
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आईटी सचिव एस. कृष्णन Photograph: (ANI)

नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बुधवार को सख्त लहजे में कहा कि प्रदर्शनी लगाने वालों को ऐसी चीजें नहीं दिखानी चाहिए जो उनकी अपनी नहीं हैं. यह बयान गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा दिखाए गए एक चीनी रोबोटिक डॉग के विवाद के बाद आया है.

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क्या है पूरा मामला?

भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट का उद्घाटन किया था, जिसका मकसद भारत की AI तकनीक को दुनिया के सामने रखना था. यहां गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 'Orion' नाम का एक रोबोटिक कुत्ता पेश किया. यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने दूरदर्शन को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि इसे उनके 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने खुद तैयार किया है.

कैसे खुली पोल?

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया और तकनीकी जानकारों के पास पहुंचा, हंगामा मच गया. लोगों ने तुरंत पहचान लिया कि यह कोई स्वदेशी रोबोट नहीं, बल्कि चीन की कंपनी 'Unitree Robotics' का 'Unitree Go2' मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपये में बिकता है.

सरकार की सख्त कार्रवाई

विवाद बढ़ते ही सरकार ने कड़ा रुख अपनाया. सूत्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी को तुरंत अपना स्टॉल खाली करने को कहा गया और उनके पवेलियन की बिजली भी काट दी गई. आईटी सचिव ने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग केवल अपना असली काम ही यहां दिखाएं. हम ऐसी प्रदर्शनियों में किसी भी तरह का विवाद या गलत जानकारी नहीं चाहते."

यूनिवर्सिटी ने क्या सफाई दी?

मामला बिगड़ता देख गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने माफीनामा जारी किया है. यूनिवर्सिटी ने कहा कि स्टॉल पर मौजूद उनकी प्रतिनिधि (प्रोफेसर नेहा सिंह) को रोबोट की तकनीकी जानकारी नहीं थी और कैमरे के सामने उत्साह में उन्होंने गलत जानकारी दे दी. यूनिवर्सिटी ने अब साफ किया है कि उन्होंने यह रोबोट बनाया नहीं है, बल्कि वे इसके जरिए छात्रों को नई तकनीक सिखाना चाहते थे.

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