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दिल्ली प्रदूषण Photograph: (ANI)
दिल्ली एनसीआर समेत राजस्थान के जयपुर और अन्य बड़े शहरों में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर स्तर पर बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अब चेतावनी दी है कि प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों पर नहीं, बल्कि दिमाग पर भी सीधे पड़ रहा है। नए अध्ययनों में डिमेंशिया के बढ़ते खतरे का संकेत मिला है।
भूलने की बीमारी की चपेट में
दिल्ली के एनसीआर समेत राजस्थान के कुछ शहरों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 300 के पार पहुंच चुका है। ऐसी स्थिति में हवा के महीन कण शरीर में गहराई तक पहुंचकर दिमाग की कोशिकाओं में सूजन को बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यही सूजन आगे चलकर डिमेंशिया का कारण बनेगी। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नितिन द्विवेदी के अनुसार, वायु प्रदूषण ‘न्यूरोइन्फ्लेमेशन’ को बढ़ाता है। जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो दिमाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और व्यक्ति भूलने की बीमारी की चपेट में जा सकता है।
डॉ. नितिन द्विवेदी, न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया, रिसर्च में यह भी सामने आया है कि प्रदूषण खून को गाढ़ा करता है, जिससे फेफड़ों और हृदय के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। जिन क्षेत्रों में पीएम स्तर अधिक होता है, वहां मानसिक विकारों के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
18 लाख स्ट्रोक के मामले सामने आते है
डॉ. नितिन द्विवेदी, न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा, विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे रोजाना कम प्रदूषण वाले स्थान पर कुछ समय टहलें और हाई बीपी तथा कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों की दवाइयां समय पर लेते रहें। इससे प्रदूषण के दिमाग पर पड़ने वाले प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. नितिन द्विवेदी, न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है,‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2021’ के मुताबिक, भारत में हर साल लगभग 18 लाख स्ट्रोक के मामले सामने आते है. इनमें से करीब 7 लाख मौतें केवल स्ट्रोक के कारण दर्ज की जाती हैं।
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