Explainer: चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन! हिंद महासागर में भारत का 'पावर शो', 1500 KM तक मार करेगी ये नई हाइपरसोनिक मिसाइल

DRDO की लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार प्रदर्शित होगी. 1500 किमी रेंज वाली यह मिसाइल भारतीय नौसेना की समुद्री स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई देगी और आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक का प्रतीक बनेगी.

DRDO की लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार प्रदर्शित होगी. 1500 किमी रेंज वाली यह मिसाइल भारतीय नौसेना की समुद्री स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई देगी और आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक का प्रतीक बनेगी.

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Ravi Prashant
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Long-range Anti-Ship Hypersonic Glide Missile

लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल Photograph: (X/@ANI)

भारत अपनी रक्षा क्षमताओं में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर छूने जा रहा है. Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने एक ऐसी मिसाइल बनाई है जिसका नाम है लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM). सबसे खास बात यह है कि इस बार 26 जनवरी यानी रिपब्लिक डे (Republic Day)की परेड में पूरी दुनिया इस मिसाइल का जलवा देखेगी. कर्तव्य पथ पर पहली बार इसे जनता के सामने लाया जाएगा. यह सिर्फ एक हथियार नहीं है, बल्कि यह दुनिया को एक मैसेज है कि भारत अब अत्याधुनिक तकनीक के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं है. 

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 1500 किलोमीटर दूर दुश्मन का काल

इस मिसाइल को खास तौर पर भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी रेंज है. यह मिसाइल 1500 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है. यानी इस मिसाइल की रेंज में पाकिस्तान के कई शहरों आ जाएंगे.  वहीं हिंद महासागर में कहीं दूर कोई दुश्मन का जहाज भारत की ओर बुरी नजर डालता है, तो यह मिसाइल उसे अपनी जगह से हिले बिना ही तबाह कर सकती है. इतनी लंबी दूरी की मारक क्षमता होने से भारतीय नौसेना को समुद्र में एक जबरदस्त बढ़त मिल जाएगी

हाइपरसोनिक स्पीड पलक झपकते ही काम तमाम

मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाइपरसोनिक स्पीड है. साधारण भाषा में कहें तो यह आवाज की रफ्तार से भी कई गुना तेज चलती है. प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए प्रसाद गौड़ के मुताबिक, यह मिसाइल हवा में बहुत ही सफाई से तैरती है (जिसे ग्लाइड करना कहते हैं) और अपनी तेज रफ्तार को अंत तक बनाए रखती है. इतनी तेज गति का फायदा यह है कि दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे. और अगर रडार ने इसे देख भी लिया, तो उनके डिफेंस सिस्टम के पास इस मिसाइल को रोकने के लिए समय ही नहीं बचेगा. यह मिसाइल अलग-अलग तरह के विस्फोटक (पेलोड) ले जाने में सक्षम है और किसी भी बड़े युद्धपोत को पल भर में समंदर में डुबो सकती है.

सिर्फ 15 मिनट में खेल खत्म

समय किसी भी युद्ध में सबसे कीमती चीज होती है. LRAShM मिसाइल की सबसे डरावनी (दुश्मन के लिए) बात यह है कि यह 1500 किलोमीटर की दूरी महज 15 मिनट में तय कर सकती है. जरा सोचिए, जब तक दुश्मन का जहाज खतरे को भांपेगा और अपने बचाव की तैयारी करेगा, तब तक यह मिसाइल अपना काम कर चुकी होगी. यह 'तेज प्रतिक्रिया' वाली क्षमता भारत को समंदर में एक 'गेम चेंजर' प्लेयर बनाती है. इससे दुश्मन के पास काउंटर-अटैक करने का मौका ही नहीं बचता.

3500 किलोमीटर तक की प्लानिंग

DRDO सिर्फ यहीं नहीं रुकने वाला है. अभी जो तकनीक हम देख रहे हैं, वह तो बस शुरुआत है. प्रसाद गौड़ ने संकेत दिए हैं कि भारत अब हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल पर भी काम कर रहा है. इतना ही नहीं, आने वाले समय में वैज्ञानिक ऐसी मिसाइलें बनाने की तैयारी में हैं जिनकी रेंज 3000 से 3500 किलोमीटर तक होगी. इसका मतलब यह है कि भारत की सुरक्षा दीवार और भी ज्यादा मजबूत और लंबी होने वाली है. भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक है.

हिंद महासागर में भारत का 'पावर शो'

गणतंत्र दिवस पर इस मिसाइल का प्रदर्शन सिर्फ एक परेड का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश है. हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह बहुत जरूरी था. यह मिसाइल दिखाती है कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का यह सबसे सटीक उदाहरण है, जहां हम न केवल हथियार बना रहे हैं, बल्कि ऐसी तकनीक ला रहे हैं जो दुनिया के बहुत कम देशों के पास है.

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