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डिलीवरी बॉय Photograph: (Freepik)
Zomato और Blinkit ने नए साल की शाम पर डिलीवरी के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया. कंपनी के Founder Deepinder Goyal ने कहा कि बीते कुछ दिनों से सुनाई दे रही हड़ताल की धमकियों का दोनों प्लेटफॉर्म्स पर कोई असर नहीं पड़ा. उनके अनुसार, दोनों प्लेटफॉर्म्स पर कुल 4.5 लाख से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स ने एक ही दिन में 75 लाख से ज्यादा ऑर्डर डिलीवर किए, जो अब तक का सबसे बड़ा नंबर्स हैं. इन ऑर्डर्स के जरिए 63 लाख से अधिक ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचाई गईं.
बिना अतिरिक्त इंसेंटिव के ऑल-टाइम हाई
Deepinder Goyal ने स्पष्ट किया कि यह रिकॉर्ड किसी अतिरिक्त इंसेंटिव के कारण नहीं बना. उन्होंने कहा कि नए साल की पूर्व संध्या पर आमतौर पर इंसेंटिव सामान्य दिनों से अधिक होते हैं, लेकिन इस बार भी वही व्यवस्था रही जो पिछले वर्षों में रही है. डिलीवरी पार्टनर्स को किसी तरह का असाधारण लाभ नहीं दिया गया. यह बयान ऐसे समय में आया है जब गिग वर्कर्स से जुड़ी स्थितियों को लेकर सार्वजनिक बहस तेज है. Goyal ने कहा कि आंकड़े यह दिखाते हैं कि सिस्टम सुचारू रूप से काम कर रहा है.
प्रशासन और पुलिस की भूमिका को लेकर क्या कहा?
उन्होंने देशभर में स्थानीय प्रशासन और पुलिस का आभार जताया. Goyal के अनुसार, स्थानीय कानून व्यवस्था एजेंसियों के सहयोग से कुछ शरारती तत्वों को काबू में रखा गया, जिससे ग्राउंड पर काम कर रही टीमों को बिना किसी बाधा के संचालन जारी रखने में मदद मिली. कंपनी की जमीनी टीमें और प्रशासन के बीच तेज तालमेल को उन्होंने इस सफलता का एक अहम कारण बताया.
डिलीवरी पार्टनर्स को विशेष धन्यवाद
Deepinder Goyal ने सबसे ज्यादा धन्यवाद डिलीवरी पार्टनर्स को दिया. उन्होंने कहा कि धमकियों और दबाव के बावजूद पार्टनर्स ने काम पर आकर ईमानदारी और तरक्की का रास्ता चुना. उनके मुताबिक, अगर कोई सिस्टम मूल रूप से गलत होता, तो वह इतने बड़े पैमाने पर लोगों को आकर्षित नहीं कर पाता और न ही लंबे समय तक उन्हें अपने साथ जोड़कर रख पाता.
गिग इकॉनमी पर Goyal का नजरिया
गोयल ने कहा कि गिग इकॉनमी भारत के सबसे बड़े संगठित रोजगार सृजन इंजनों में से एक है. समय के साथ इसका असर और गहरा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि स्थिर आय और शिक्षा के सहारे डिलीवरी पार्टनर्स के बच्चे भविष्य में वर्कफोर्स में शामिल होंगे और देश के सामाजिक-आर्थिक बदलाव में योगदान देंगे. उनका मानना है कि निहित स्वार्थों द्वारा फैलाई जा रही नकारात्मक बातों में बहने के बजाय गिग इकॉनमी के दीर्घकालिक प्रभाव को समझना जरूरी है.
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