NCERT की किताब पर मचा बवाल: PM मोदी ने जताई सख्त नाराजगी, पूछा- "बच्चों को हम क्या पढ़ा रहे हैं?"

एनसीईआरटी की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय को लेकर विवाद गहरा गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी जताई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक के प्रकाशन और डिजिटल प्रसार पर रोक लगा दी है. मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

एनसीईआरटी की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय को लेकर विवाद गहरा गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाराजगी जताई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक के प्रकाशन और डिजिटल प्रसार पर रोक लगा दी है. मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

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Ravi Prashant
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पीएम नरेंद्र मोदी Photograph: (ANI)

एनसीईआरटी की क्लास 8 की नई सोशल साइंस की किताब को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है. ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से शामिल अध्याय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सुप्रीम कोर्ट Supreme तक ने सख्त रुख अपनाया है.

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प्रधानमंत्री की नाराजगी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल ही में नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठा. प्रधानमंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पूछा कि इस तरह की संवेदनशील सामग्री को मंजूरी कैसे दी गई और इसकी निगरानी किस स्तर पर हो रही थी. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में सवाल किया कि आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को आखिर क्या पढ़ाया जा रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट की रोक

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादित अध्याय वाली पुस्तक के आगे प्रकाशन, छपाई और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. अदालत ने संकेत दिया है कि वह पूरे प्रकरण की गहन जांच चाहती है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और National Council of Educational Research and Training के निदेशक को नोटिस जारी किया है. अदालत ने पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए.

किताब में क्या था विवादित

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक अध्याय के अंतर्गत ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से एक खंड जोड़ा गया था. इसमें न्यायपालिका के समक्ष मौजूद चुनौतियों का उल्लेख किया गया था, जिनमें विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार, मामलों का भारी बैकलॉग, जजों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं और आधारभूत ढांचे की कमजोरियां शामिल थीं. इसी सामग्री को लेकर विवाद खड़ा हुआ और इसे न्यायपालिका की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया गया.

आगे की कार्रवाई

फिलहाल पुस्तक के प्रकाशन पर रोक है और सरकार पाठ्यपुस्तकों की स्वीकृति प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है. सूत्रों का कहना है कि पूरे सिस्टम की जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की गहन जांच की संभावना है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस प्रकरण में किस स्तर पर चूक हुई और शिक्षा मंत्रालय पाठ्यक्रम में क्या बदलाव करता है.

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