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भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में कुल नौ उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जिनके जरिए पार्टी ने अलग-अलग राज्यों में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का संकेत दिया है.
बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है. असम से तेराश गोवाला और जोगेन मोहन को मौका मिला है. छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को पार्टी ने मैदान में उतारा है, जबकि हरियाणा से पूर्व सांसद संजय भाटिया को राज्यसभा के लिए नामित किया गया है. ओडिशा में प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को टिकट दिया गया है. पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा को उम्मीदवार घोषित किया गया है.
इन नामों के चयन से स्पष्ट है कि पार्टी ने संगठनात्मक अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखा है.
16 मार्च को मतदान, 5 मार्च अंतिम दिन
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया तेज हो चुकी है. बिहार समेत 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को मतदान होना है. बिहार की पांच सीटों के लिए अधिसूचना 26 फरवरी को जारी की गई थी। नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च तय है.
चूंकि 3 और 4 मार्च को होली का अवकाश है, ऐसे में नामांकन दाखिल करने के लिए व्यावहारिक रूप से केवल एक दिन ही बचा है. इससे राजनीतिक दलों की सक्रियता और बढ़ गई है.
बिहार में पांच सीटों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है. संख्याबल के आधार पर समीकरण अहम भूमिका निभाएंगे.
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बिहार की पांच सीटें क्यों अहम?
अप्रैल में जिन पांच सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, प्रेमचंद्र गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं.
इनमें हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर जनता दल (यूनाइटेड) से, प्रेमचंद्र गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह राष्ट्रीय जनता दल से तथा उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय लोक मोर्चा से जुड़े रहे हैं. ऐसे में इस बार का चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
रणनीति और समीकरण पर नजर
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि विधायकों द्वारा किए जाते हैं, इसलिए विधानसभा में पार्टियों की ताकत निर्णायक होती है. बिहार की राजनीति में बदलते समीकरणों को देखते हुए यह चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि प्रभाव और संदेश का भी है.
पहली सूची जारी कर भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संगठन और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जता रही है. अब सभी की नजर नामांकन प्रक्रिया और संभावित क्रॉस-वोटिंग की आशंकाओं पर टिकी है, जो इस चुनाव को और दिलचस्प बना सकती है.
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