ट्रेड डील की इनसाइड स्टोरी: ट्रंप की 'बुलिंग' के आगे कैसे दीवार बनकर खड़े हुए अजीत डोभाल?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर एक रिपोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अमेरिकी दबाव का विरोध किया और साफ किया कि जरूरत पड़ी तो वह समझौते के लिए 2029 तक इंतजार कर सकता है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर एक रिपोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अमेरिकी दबाव का विरोध किया और साफ किया कि जरूरत पड़ी तो वह समझौते के लिए 2029 तक इंतजार कर सकता है.

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Ravi Prashant
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इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील Photograph: (NN)

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है. जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपनी बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि भारत ने इस डील के लिए काफी कड़ा रुख अपनाया था. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में भारत के एनएसए (NSA) अजीत डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच एक प्राइवेट मीटिंग हुई थी.

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इस मीटिंग में डोभाल ने सा कर दिया कि भारत किसी भी तरह की धमकियों के आगे नहीं झुकेगा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर सही शर्तों पर बात नहीं बनी, तो भारत व्यापार समझौते के लिए 2029 तक भी रुकने को तैयार है.

धमकियों पर भारत का कड़ा जवाब

रिपोर्ट के अनुसार, अजीत डोभाल ने अमेरिका को याद दिलाया कि भारत पहले भी कई मुश्किल हालातों का सामना कर चुका है. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि ट्रंप और उनके अधिकारी पब्लिक में भारत की बुराई करना बंद करें. डोभाल ने साफ किया कि भारत को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कहा जा रहा है कि इस सख्त संदेश के बाद ही ट्रंप के बोलने के अंदाज में थोड़ी नरमी आई थी.

रिश्तों में क्यों आई थी खटास?

भारत और अमेरिका के बीच तनाव तब बढ़ गया था जब मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के मामले में ट्रंप के दावों को नई दिल्ली ने सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बाद ट्रंप के करीबियों ने पीएम मोदी पर कमेंट्स किए और भारतीय सामानों पर 50% तक टैक्स (टैरिफ) लगा दिया. इससे दोनों देशों के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी.

डील को लेकर ट्रंप का दावा

हाल ही में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एलान किया कि भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल हो गई है. पीएम मोदी ने बातचीत होने की बात तो मानी, लेकिन डील में क्या-क्या तय हुआ है, इसकी पूरी जानकारी नहीं दी. कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भी बस इतना कहा कि बातचीत पूरी हो चुकी है.

विपक्ष के सवाल और चुनावी माहौल

भारत में विपक्षी पार्टियां अब सरकार से पूछ रही हैं कि क्या इस डील के लिए भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुक गया है? हालांकि, डोभाल और रूबियो की मीटिंग को देखकर लगता है कि भारत ने खेती और डेयरी जैसे अहम सेक्टरों पर अपनी बात मनवाई होगी. वहीं, अमेरिका में चुनाव नजदीक हैं, इसलिए ट्रंप इस डील को अपनी बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश कर रहे हैं.

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