संसद से सड़क तक पहुंचा ‘किताबी संग्राम’, निशिकांत दुबे ने सदन में नेहरू के पत्र से बढ़ाई सियासी आग

संसद में शुरू हुआ सियासी टकराव अब सोशल मीडिया और सड़कों तक पहुंच चुका है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला दिए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर आ गया है.

संसद में शुरू हुआ सियासी टकराव अब सोशल मीडिया और सड़कों तक पहुंच चुका है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला दिए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर आ गया है.

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Dheeraj Sharma
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Book Row in parliament

संसद में शुरू हुआ सियासी टकराव अब सोशल मीडिया और सड़कों तक पहुंच चुका है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला दिए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर आ गया है. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और गांधी परिवार को घेरने के लिए ऐतिहासिक किताबों और दस्तावेजों का सहारा लेना शुरू कर दिया है.

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लोकसभा में किताबें लेकर पहुंचे निशिकांत दुबे

राहुल गांधी के बयान के जवाब में निशिकांत दुबे लोकसभा में गांधी परिवार पर लिखी गई किताबें लेकर पहुंचे. इनमें से कुछ किताबों में किए गए दावों को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला. दुबे के बयान के बाद कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए.

सोशल मीडिया पर नेहरू का पत्र, कांग्रेस पर तंज

संसद के बाहर भी यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक पुराना पत्र साझा किया और इसके साथ तीखा तंज कसते हुए लिखा,
'कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा, कांग्रेस की लंका में आग लग जाएगी? नेहरू-गांधी परिवार जानी दुश्मन हो जाएगा? यह पोस्ट सामने आते ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई.

क्या है नेहरू का यह पत्र?

निशिकांत दुबे की ओर से साझा किए गए पोस्ट के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू ने 30 जनवरी 1961 को तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल के.एम. करिअप्पा को एक पत्र लिखा था. पत्र में नेहरू ने लिखा, 'माय डियर करिअप्पा, मुझे 26 और 27 जनवरी के आपके दो पत्र मिले. एडविना माउंटबेटन मेमोरियल फंड के लिए किसी डांस प्रोग्राम या शो का आयोजन अच्छी बात होगी.'

संसद को प्राथमिकता देने की बात

नेहरू आगे लिखते हैं कि वे बेंगलुरु में किसी शो में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि संसद का अगला सत्र फरवरी की शुरुआत में शुरू होने वाला है और मई तक चलेगा. उन्होंने साफ कहा कि बजट सत्र बेहद अहम है और संसद छोड़कर किसी कार्यक्रम में जाना उनके लिए उचित नहीं होगा.

एडविना माउंटबेटन का जिक्र भी चर्चा में

पत्र में नेहरू ने ऑल इंडिया रेडियो (AIR) की ओर से एडविना माउंटबेटन से जुड़ी खबरों को प्रमुखता दिए जाने का भी उल्लेख किया. उन्होंने लिखा कि रानी से जुड़ी खबरें अक्सर समाचारों की शुरुआत में प्रसारित होती थीं और यह भी बताया कि वह भारत के बाद पाकिस्तान जाने वाली थीं.

सियासी विवाद और गहराने के संकेत

इस पत्र के सामने आने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है. जहां भाजपा इसे कांग्रेस की कथनी-करनी पर सवाल बताकर पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगा रही है. साफ है कि ‘किताबी संग्राम’ फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है. 

प्रियंका गांधी ने निशिकांत दुबे पर साधा निशाना

वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने निशिकांत दुबे पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी किताब के जरिए अपनी बात रख रहे थे तो उन्हें बोलने नहीं दिया गया, लेकिन निशिकांत दुबे 6 किताबें लेकर आए तो उन्हें किसी ने नहीं रोका और न ही उनका माइक बंद किया गया. 

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