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... तो इस वजह से IAF की मिसाइल ने उड़ाया था अपना ही विमान, 6 जवान हो गए थे शहीद

भारतीय वायुसेना को इस मामले में दोषी ठहराया गया है इसी वजह से जांच में थोड़ा ज्यादा समय लगा है.

News Nation Bureau | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 22 May 2019, 10:00:44 AM
दुर्घटना ग्रस्त भारतीय वायुसेना का हेलिकॉप्टर (File Pic)

दुर्घटना ग्रस्त भारतीय वायुसेना का हेलिकॉप्टर (File Pic)

highlights

  • भारतीय वायुसेना ने अपना ही हेलिकॉप्टर मार गिराया था
  • पाकिस्तानी विमान समझकर किया था हमला
  • हमले में 6 भारतीय जवान हुए थे शहीद
  • जांच के बाद दोषी अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई

नई दिल्ली:

इंडियन एयर फोर्स ने 27 फरवरी को दुर्घटनाग्रस्त हुए Mi-17 हेलिकॉप्टर मामले में अपने ही विमान को पाकिस्तानी विमान समझकर उड़ा दिया था. इस बात की जांच भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) 20 दिनों में पूरी करेगी. जांच के बाद सारे सबूत एक साथ पेश किए जाएंगे और इसमें दोषी लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है इस दुर्घटना में भारतीय सेना 6 जवान और जमीन पर एक नागरिक की मौत हो गई थी. हादसे के जिम्मेदार लोगों पर वायु सेना अधिनियम 1950 के सैन्य कानून के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला चलाया जा सकता है.

एनडीटीवी की खबर के अनुसार, '27 फरवरी को श्रीनगर हवाई अड्डे से एक इजरायल निर्मित स्पाइडर और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के प्रक्षेपण के परिणाम पर कोई संदेह नहीं था. भारतीय वायुसेना को इस मामले में दोषी ठहराया गया है इसी वजह से जांच में थोड़ा ज्यादा समय लगा है.' एनडीटीवी ने यह भी बताया कि, 'पूरी घटना 12 सेकेंड के अंदर हुई, MI हेलिकॉप्टर को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह हमले के दायरे में है.' बता दें कि 27 फरवरी की सुबह 10 से 10.30 के बीच 8 भारतीय वायुसेना के जवान, F-16 के 24 पाकिस्तानी वायुसेना के जवानों को रोकने के लिए गए थे. F-16 ने LoC पार कर लिया था और वह भारतीय सेना पर निशाना साध रहा था.

एनडीटीवी के मुताबिक, इस दौरान पश्चिम में जारी हवाई हमले के बीच कश्मीर में भारतीय वायु सेना अलर्ट पर थी और किसी भी वक्त पाकिस्तानी विमान के आक्रमण का जवाब देने के लिए तैयार थी. ठीक इसी समय श्रीनगर एयरपोर्ट पर एयर डिफेंस की रडार ने अपनी स्क्रीन पर कम उड़ान वाला विमान देखा. उस समय टर्मिनल वीपन डायरेक्टर(TWD) के पद पर एक सीनियर अधिकारी थे जो एयर बेस के भी चीफ ऑपरेशन अधिकारी थे.

एनडीटीवी के मुताबिक इसी समय हो सकता है ऐसा हुआ हो कि वहां तैनात अधिकारी ने आईएफएफ ट्रांसपोडर सिस्टम ने कम उड़ान वाले विमान की पहचान ना कर सका हो और फायर करने का आदेश दे दिया हो. एयरक्राफ्ट में आईएफएफ सिस्टम को ग्राउंड पर इंटेरोगेशन सिग्नल के लिए प्रयोग किया जाता है जिसके जवाब से एक अलग सिग्नल निकलता है जो बताता है कि यह हमारा दोस्त है, दुश्मन नहीं है. इस सिस्टम को खास तौर पर इसलिए डिजाइन किया गया जिससे युद्ध के दौरान दोस्ताना तौर पर फायरिंग की घटना ना हो. यह साफ नहीं है कि आईएएफ के हेलिकॉप्टर्स में आईएएफ स्विच ऑफ था और जब इस विमान को गिराया गया, तब यह काम नहीं कर रहा था.

एनडीटीवी के मुताबिक, 'कोर्ट ऑफ इनक्वारी में श्रीनगर एयरबेस में वायुसेना के ट्रैफिक कंट्रोल को भी काफी करीब से देखा गया है. एटीएस सभी एयरक्रॉफ्ट के फ्लाइट प्लेन का व्यवस्थित रखता है जो टेक ऑफ होने वाले होते हैं या हो चुके होते हैं. यह साफ नहीं है कि जब टर्मिनल वेपन्स डायरेक्टर ने जांच की और एटीएस के जरिए कहा कि कोई फ्रेंडली एयरक्राफ्ट क्षेत्र में नहीं उड़ रहा था. यह साफ नहीं है कि क्यों Mi-17 हेलिकॉप्टर के कार्यक्रम की जानकारी अधिकारी के पास उपलब्ध नहीं थी.'

हालांकि सीनियर वायुसेना के अधिकारी ने उन रिपोर्ट्स को खारिज किया है जिसमें कहा गया है कि कोर्ट ऑफ इनक्वारी MI17 को गिराने के एक वीडियो पर विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक इस वीडियो में दिख रहा है कि मिसाइल हेलिकॉप्टर की तरफ जा रही है और यह सबूतों का वह हिस्सा है जिसे पेश किया गया है. वहीं अधिकारी का कहना है, 'ऐसा कोई रास्ता नहीं है कि कोई कैमरा वहां इस रेंज तक प्रभाव डालने के लिए मौजूद था.'

First Published : 22 May 2019, 10:00:44 AM

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