यूनुस सरकार ने कट्टरपंथियों को हिंसा करने के लिए खुली छूट दे दी: शेख हसीना (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

यूनुस सरकार ने कट्टरपंथियों को हिंसा करने के लिए खुली छूट दे दी: शेख हसीना (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

यूनुस सरकार ने कट्टरपंथियों को हिंसा करने के लिए खुली छूट दे दी: शेख हसीना (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

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IANS
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Islamists Battle Riot Police in Dhaka

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

ढाका, 7 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने बुधवार को देश की अंतरिम सरकार की आलोचना की। यूनुस की अंतरिम सरकार को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार ने कट्टरपंथी समूहों को बिना किसी रोक-टोक के काम करने और गैर-मुसलमानों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ बहुत ज्यादा हिंसा करने की इजाजत दी है।

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हसीना ने आईएएनएस को एक खास ई-मेल इंटरव्यू में बताया, जिम्मेदारी उन लोगों की है जो अभी सत्ता में हैं और अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं: सभी नागरिकों की बराबर सुरक्षा करना। अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई। यह एक बिना चुनी हुई सरकार की वजह से हुई है जिसने सांप्रदायिक हिंसा को बर्दाश्त किया, नकारा या कम करके आंका, जबकि कट्टरपंथी समूहों को पूरी तरह से बिना किसी सजा के काम करने दिया।

उन्होंने आगे कहा, बांग्लादेश एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के तौर पर बना था जहां सभी धर्मों के लोग बिना किसी डर के रह सकते थे। अभी का माहौल जिसमें शांतिप्रिय हिंदू, बौद्ध, ईसाई, अहमदी मुस्लिम और दूसरे अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, यह सरकार की नाकामी और कट्टरपंथी ताकतों के राजनीतिक तुष्टिकरण का सीधा नतीजा है।

बता दें, यूनुस की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ती ही जा रही है। बीते कुछ समय में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ रोंगटे खड़े करने वाले वारदात सामने आए।

स्थानीय मीडिया ने बताया कि मंगलवार को नौगांव जिले के मोहदेवपुर उपजिला के चकगोरी इलाके में लूटपाट के आरोप में भीड़ से अपनी जान बचाने के लिए एक और हिंदू आदमी नहर में कूद गया। पीड़ित की पहचान 25 साल के मिथुन सरकार के तौर पर हुई है, और इस परेशान करने वाली घटना में उसकी जान चली गई।

यह 19 दिनों में सातवीं और इस हफ्ते की तीसरी घटना है, जो पूरे बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को निशाना बनाकर सुनियोजित तरीके से की जा रही है। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा बेहद चिंताजनक है।

सोमवार को, बांग्लादेश में 24 घंटे के अंदर अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदू पुरुषों की हत्या कर दी गई। पहले पीड़ित की पहचान 40 साल के सरत चक्रवर्ती मणि के तौर पर हुई, जिन पर सोमवार रात ढाका के नरसिंगडी जिले में कथित तौर पर एक कट्टरपंथी हथियारबंद धार्मिक ग्रुप ने धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया।

इसके अलावा, दूसरी घटना में, जशोर जिले के मोनीरामपुर उपजिला में एक हिंदू बिजनेसमैन, 38 साल के राणा प्रताप बैरागी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले शनिवार को, शरियतपुर जिले के दामुड्या उपजिला में बदमाशों की भीड़ ने एक और हिंदू आदमी, खोकन चंद्र दास पर बेरहमी से हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई।

इससे पहले पिछले हफ्ते, मैमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में 40 साल के बजेंद्र बिस्वास की उनके एक साथी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। 24 दिसंबर को, बांग्लादेशी मीडिया ने एक और हिंदू युवक की हत्या की जानकारी दी। युवक की पहचान 29 साल के अमृत मंडल के तौर पर हुई, जिसे बांग्लादेश में कालीमोहर यूनियन के हुसैनडांगा इलाके में भीड़ ने कथित तौर पर मौत के घाट उतार दिया था।

18 दिसंबर को, एक 25 साल के हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास को झूठे ईशनिंदा के आरोपों में भीड़ ने बेरहमी से मार डाला। दरिंदगी की हद ये थी कि भीड़ ने दास को मार डाला और फिर उसकी लाश को आग लगाने से पहले एक पेड़ से लटका दिया।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल ने अगस्त 2024 से जुलाई 2025 तक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 2,442 घटनाओं और 150 से ज्यादा मंदिरों में तोड़फोड़ का रिकॉर्ड दर्ज किया।

--आईएएनएस

केके/डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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