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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे पुर्तगाल में रविवार (8 फरवरी) को दूसरे राउंड की वोटिंग होने जा रहे हैं। इस चुनावी माहौल में देश की पारंपरिक राजनीतिक पार्टियां एक असामान्य रणनीति अपनाती दिख रही हैं। वैचारिक मतभेदों के बावजूद कई प्रतिद्वंद्वी दल एकजुट होकर दक्षिणपंथी चरमपंथी ताकतों को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं।
हाल के महीनों में पुर्तगाल गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का दंश झेल रहा है। इससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ, और सरकार की आपदा प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठे। इन्हीं परिस्थितियों के बीच चुनाव होने से जनता की नाराजगी और असंतोष राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
इस चुनाव में मुख्यधारा की पार्टियों का मानना है कि आर्थिक अनिश्चितता, आपदाओं के बाद की परेशानियां और राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर दक्षिणपंथी चरमपंथी दल समर्थन बढ़ा सकते हैं। इसी आशंका के चलते वैचारिक रूप से अलग-अलग दलों ने संकेत दिए हैं कि वे चुनाव के बाद गठबंधन या आपसी सहयोग के जरिये चरम दक्षिणपंथ को सत्ता में आने से रोकेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव केवल सरकार चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुर्तगाल के लोकतांत्रिक मूल्यों और उसकी भविष्य की दिशा को भी तय करेगा। मतदाता अब यह तय करेंगे कि वे संकट के समय किस तरह की राजनीति और नेतृत्व पर भरोसा करना चाहते हैं—टकराव और ध्रुवीकरण पर आधारित, या सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित।
मध्यम-वामपंथी उम्मीदवार एंटोनियो जोस सेगुरो ने 18 जनवरी को हुए चुनाव के पहले राउंड में 31.1 फीसदी वोट हासिल किए थे।
वहीं, धुर-दक्षिणपंथी पार्टी चेगा (जो अब संसद में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है) के नेता आंद्रे वेंचुरा को 23.5 फीसदी वोट मिले, जबकि कंजर्वेटिव प्रो-बिजनेस लिबरल इनिशिएटिव पार्टी के जोआओ कोट्रिम डी फिगुएरेडो 11 उम्मीदवारों में तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें लगभग 16 फीसदी वोट मिले। पुर्तगाल की सत्ताधारी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (पीएसडी) के उम्मीदवार लुई मार्केस मेंडेस 11.3 फीसदी वोटों के साथ पांचवें स्थान पर रहे।
ओपिनियन पोल बताते हैं कि सेगुरो की जीत तय है। मंगलवार देर रात जारी कैटोलिका यूनिवर्सिटी के सर्वे के अनुसार, सोशलिस्ट उम्मीदवार को 67 फीसदी ने पसंद किया है, जबकि 33 फीसदी लोग वेंचुरा को सत्ता पर काबिज होते देखना चाहते हैं।
अगर पोल सही साबित होते हैं, तो सेगुरो पुर्तगाल में सत्तावादी शासन खत्म होने के बाद पिछले पांच दशकों में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए सबसे ज्यादा वोट हासिल करेंगे।
सेगुरो को सबसे पहले सपोर्ट देने वालों में दो सेंटर-राइट नेता थे: पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री एनीबल कैवाको सिल्वा और पूर्व उप प्रधानमंत्री पाउलो पोर्टास।
कुछ नेता, पूर्व मंत्री, जाने-माने बुद्धिजीवी, और दूसरे लोग समेत 6,600 से अधिक लोगों ने सेगुरो के समर्थन में एक हस्ताक्षर अभियान तक चलाया।
वहीं, सेगुरो को सपोर्ट देने वाले दूसरे कंजर्वेटिव लोगों ने ऐसा मन मारकर किया है। लिस्बन के सेंटर-राइट मेयर कार्लोस मोएडास ने पुर्तगाली पब्लिकेशन एक्सप्रेसो को बताया कि वह सेगुरो को वोट देंगे क्योंकि समाजवादी उम्मीदवार ऐसे हैं जो लोगों को बांटने में विश्वास नहीं करते।
सेगुरो को कंजर्वेटिव्स के समर्थन पर मीडिया का काफी ध्यान गया है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि यह शायद बहुत ज़्यादा असरदार साबित न हो। वो मानते हैं कि मैदान में उतरे कुछ चरमपंथी उतने जाने-माने नहीं हैं या उन्हें किनारे कर दिया गया है। विपक्षी लिबरल नेता ये जानते हैं और इसे ही प्रोजेक्ट किया जा रहा है।
चुनाव के दूसरे दौर का कैंपेन दो बड़े तूफानों के कारण घटा दिया गया, जिससे 15 फरवरी तक देश में आपातकाल की घोषणा कर दी गई। वेंचुरा ने वोटिंग को एक हफ्ते के लिए टालने की मांग की और इसे सभी पुर्तगालियों के बीच समानता का मामला बताया। लेकिन, राष्ट्रीय चुनाव प्राधिकरण ने उनकी मांग को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि वोटिंग तय समय पर ही होगी।
--आईएएनएस
केआर/
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