स्मृति शेष: कवि जॉन कीट्स, जिनका नाम 'पानी पर लिखा था' और वह इतिहास में अमर हो गए

स्मृति शेष: कवि जॉन कीट्स, जिनका नाम 'पानी पर लिखा था' और वह इतिहास में अमर हो गए

स्मृति शेष: कवि जॉन कीट्स, जिनका नाम 'पानी पर लिखा था' और वह इतिहास में अमर हो गए

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IANS
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John Keats

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। मेरा हृदय पीड़ा से भरा है, और एक जड़ता मुझे घेर रही है… यह पंक्तियां महान अंग्रेजी रोमांटिक कवि जॉन कीट्स की प्रसिद्ध कविता ओड टू अ नाइटिंगेल का हिंदी भावानुवाद हैं। इन शब्दों में जीवन की क्षणभंगुरता और आत्मा की गहरी उदासी का स्वर गूंजता है। विडंबना यह रही कि जिस कवि ने जीवन और मृत्यु के रहस्यों को इतनी संवेदनशीलता से उकेरा, वह 25 वर्ष की आयु में 23 फरवरी 1821 को इस दुनिया से विदा हो गया।

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कीट्स की कविताओं में सौंदर्य और सत्य का अद्भुत मेल है। उनकी एक अन्य कालजयी रचना ओड ऑन अ ग्रेशियन अर्न की प्रसिद्ध पंक्ति—सौंदर्य ही सत्य है, और सत्य ही सौंदर्य—कला और जीवन के संबंध पर उनके गहरे विश्वास को दर्शाती है। यह कथन आज भी साहित्य और दर्शन की बहस का हिस्सा बना हुआ है।

1819 में लिखी गई टू ऑटम में वे शरद ऋतु का चित्र खींचते हुए मानो जीवन की परिपक्वता और उसके अनिवार्य अवसान को स्वीकारते हैं। हिंदी भाव में कहें तो कविता का स्वर कुछ यूं उभरता है— “कोमल धूप में पकी फसलों की मुस्कान, और झरते पत्तों में समय की आहट।” यह प्रकृति के माध्यम से जीवन-दर्शन को व्यक्त करने की उनकी अद्वितीय क्षमता को दिखाता है।

उनकी लंबी कविता एंडिमियन की आरंभिक पंक्ति—सुंदर वस्तु सदा के लिए आनंद का स्रोत होती है”—आज भी साहित्य प्रेमियों को प्रेरित करती है। यद्यपि उनके जीवनकाल में इस कृति की आलोचना हुई, पर बाद में यही पंक्तियां उनकी पहचान बन गईं।

कीट्स का जीवन संघर्षों से भरा था—आर्थिक कठिनाइयां, पारिवारिक दुख और बीमारी। फिर भी उन्होंने कविता में ऐसी अमरता पाई कि आज उन्हें पर्सी बिशे शेली और लॉर्ड बायरन के साथ रोमांटिक युग के महान कवियों में गिना जाता है। उनकी समाधि पर अंकित शब्दों का हिंदी भाव है—यहां वह व्यक्ति सोया है, जिसका नाम पानी पर लिखा गया था, मानो उन्होंने स्वयं अपने क्षणभंगुर जीवन को अपनी कलम के जरिए अमर कर दिया हो।

--आईएएनएस

केआर/

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