ईरान के हालात पर छलका मंदाना करीमी का दर्द, बोलीं-मैं भी महसा अमीनी हो सकती थी

ईरान के हालात पर छलका मंदाना करीमी का दर्द, बोलीं-मैं भी महसा अमीनी हो सकती थी

ईरान के हालात पर छलका मंदाना करीमी का दर्द, बोलीं-मैं भी महसा अमीनी हो सकती थी

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IANS
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खुशकिस्मत हूं कि 18 की उम्र में ईरान छोड़ दिया-  मंदाना करीमी

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

मुंबई, 6 मार्च (आईएएनएस)। ईरान में जन्मीं और भारतीय सिनेमा में अपना नाम बना रही अभिनेत्री मंदाना करीमी ने हाल ही में ईरान की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर अपनी राय रखी। उन्होंने ईरान के हालात को लेकर गहरा दुख जताया।

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अभिनेत्री ने ईरान की महिलाओं और लोगों पर हो रहे अत्याचारों की गहरी पीड़ा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा, मैंने ये बातें सिर्फ सुनी नहीं हैं, बल्कि अपनी जिंदगी में जी हैं। मेरा जन्म ईरान में हुआ था और मैं 18 साल की उम्र तक वहीं रही हूं। करीब चार साल पहले तक मेरे पास ईरान का पासपोर्ट भी था। इसलिए ये मेरे अपने अनुभव है, कोई सुनी-सुनाई कहानी नहीं।

मंदाना करीमी ने कहा, जब मैं ईरान छोड़कर बाहर आई, तब मुझे वहां की असल स्थिति का पता चला। मेरे कई दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ लोगों को तो फांसी तक दे दी गई है। 8 जनवरी को हुई सामूहिक हत्याएं बेहद दर्दनाक थीं। मैं चाहती हूं कि आप इसे हमारे नजरिए से भी देखें। एक ईरानी महिला के तौर पर, जिसने वो जिंदगी जी है, मुझे पता है कि ये शासन कितना क्रूर हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 48 साल से पूरा ईरान इस शासन से आजादी की कोशिश कर रहा है। 8 और 9 जनवरी को लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन शासन ने एक ही दिन में कई लोगों को मार दिया। उन्होंने कहा, वहां के लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी और कुछ लोगों को मदद भी मिली।

अभिनेत्री मंदाना करीमी ने कहा, इसलिए मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि इसे इस नजर से भी देखिए। सिर्फ यह मत पूछिए कि लोग युद्ध क्यों चाहते हैं, बल्कि यह समझने की कोशिश कीजिए कि वे इस समय क्या महसूस कर रहे हैं। लोग यह क्यों कहते हैं कि इजराइल और अमेरिका ईरान पर हमला करे या देश को तबाह कर दे।

उन्होंने आगे कहा, ईरान की महिलाओं ने जो दर्द सहा है, वह कल्पना से भी परे है। मंदाना ने अपनी खुशकिस्मती बताई कि वे 18 साल की उम्र में वहां से निकल आईं। वे कहती हैं, हर दिन जब मैं अपने दोस्तों और परिवार से वहां की तस्वीरें और खबरें देखती हूं, तो मुझे लगता है कि मैं कितनी खुशकिस्मत थी कि 18 साल की उम्र में वहां से निकल आई, क्योंकि मैं भी महसा अमीनी में से एक हो सकती थी, जो 8 जनवरी को सड़कों पर निकले थे और फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौटे और इतना ही नहीं, उनके माता-पिता को तो यह भी नहीं पता कि उनके बच्चों की लाश कहां है।

महसा अमीनी ईरान की एक 22 वर्षीय कुर्द मूल की महिला थीं, जिनकी 2022 में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। अभिनेत्री ने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा कि कई महिलाएं मुझसे सवाल पूछती हैं, तुम कैसी महिला हो? तुम्हें उन बच्चों की परवाह नहीं जो स्कूल पर हुए हमले में मारे गए?

तो मैं उनसे पूछती हूं, जब मैं जनवरी, फरवरी और मार्च में सड़कों पर लोगों से अपील कर रही थी कि ईरान की आवाज बनो, तब आप कहां थीं? तब आप सब चुप थीं और अब अचानक सबकी राय बन गई है। इसलिए नहीं, धन्यवाद।

--आईएएनएस

एनएस/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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