समिट में अमेरिका ने ग्लोबल एआई गवर्नेंस को किया खारिज, कहा-हर देश अपनी नीति खुद तय करे

समिट में अमेरिका ने ग्लोबल एआई गवर्नेंस को किया खारिज, कहा-हर देश अपनी नीति खुद तय करे

समिट में अमेरिका ने ग्लोबल एआई गवर्नेंस को किया खारिज, कहा-हर देश अपनी नीति खुद तय करे

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IANS
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US rejects global AI governance, pushes sovereign stack at Delhi summit

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

वॉशिंगटन, 21 फरवरी (आईएएनएस)। नई दिल्ली में हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अमेरिका ने साफ कहा कि वह एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के लिए किसी तरह की वैश्विक केंद्रीकृत व्यवस्था या नियंत्रण के पक्ष में नहीं है।

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व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के डायरेक्टर माइकल क्रै‌ट्सियोस ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और एआई पॉलिसी और सॉवरेनिटी को लेकर एक साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी जरूरत और अपने राष्ट्रीय हित के हिसाब से एआई नीति बनानी चाहिए। एआई का नियंत्रण किसी एक वैश्विक संस्था या सख्त अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत नहीं होना चाहिए। एआई को लेकर नियम-कानून लोकल यानी देश-स्तर पर तय होने चाहिए।

उन्होंने कहा, “जैसा कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने कई बार कहा है कि हम एआई के ग्लोबल गवर्नेंस को पूरी तरह से रिजेक्ट करते हैं। हमारा मानना ​​है कि अगर एआई ब्यूरोक्रेसी और केंद्रीय नेतृत्व के अंतर्गत है, तो इसे अपनाने से बेहतर भविष्य नहीं बन सकता।”

क्रैट्सियोस ने कहा कि एआई गवर्नेंस लोकल रहनी चाहिए और नेशनल इंटरेस्ट के साथ अलाइन होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “एआई गवर्नेंस को खास लोगों की खास जरूरतों और इंटरेस्ट पर फोकस करना चाहिए और इसलिए इसे लोकल होना चाहिए।”

क्रैट्सियोस ने कहा, “रियल एआई सॉवरेनिटी का मतलब है अपने लोगों के फायदे के लिए बेस्ट-इन-क्लास तकनीक का मालिक होना और उसका इस्तेमाल करना और वैश्विक बदलावों के बीच अपनी नेशनल डेस्टिनी बनाना।”

उन्होंने पूरी तरह से तकनीकी आत्मनिर्भरता के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “किसी भी देश के लिए पूरी तरह से टेक्नोलॉजिकल आत्मनिर्भरता अवास्तविक है, क्योंकि एआई स्टैक बहुत जटिल है, लेकिन एआई को तेजी से अपनाने के साथ-साथ स्ट्रेटजिक ऑटोनॉमी हासिल की जा सकती है और यह स्वतंत्र देशों के लिए एक जरूरत है। अमेरिका मदद करना चाहता है।”

क्रेट्सियोस ने देशों से अमेरिकन एआई एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम के जरिए वॉशिंगटन के साथ साझेदारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हमारा मानना ​​है कि एआई अपनाने से हम सभी के लिए जो खुशहाली आ सकती है, उसे पाने के लिए स्वतंत्र पार्टनर बहुत जरूरी हैं। इसीलिए राष्ट्रपति ने अमेरिकन एआई एक्सपोर्ट प्रोग्राम लॉन्च किया।”

उन्होंने कहा कि वित्तीय रुकावटों को दूर करने के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक, यूएस ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी, मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन और एक नए वर्ल्ड बैंक फंड ने सभी ने नए एआई पर केंद्रित प्रोग्राम शुरू किए हैं।

इस दौरान क्रेटसियोस ने टेक कॉर्प्स का भी अनावरण किया। यह पब्लिक सर्विसेज में एआई एप्लिकेशन्स के डिप्लॉयमेंट का समर्थन करने के लिए पार्टनर देशों के साथ वॉलंटियर टेक्निकल टैलेंट को जोड़ेगा। उन्होंने कहा, “विकासशील देश एक बुनियादी बदलाव के प्वाइंट पर विकसित अर्थव्यवस्था से पीछे रह रहे हैं।” इसकी वजह उन्होंने वित्तीय दिक्कतों और टेक्निकल कैपेसिटी के अंतर को मुख्य रुकावटें बताया।

अमेरिका के तकनीकी दबदबे पर जोर देते हुए क्रेटसियोस ने घोषणा की, “एआई में गोल्ड स्टैंडर्ड अमेरिका में बना है।”

--आईएएनएस

केके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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