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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
मुंबई, 9 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि थायरॉयड से जुड़ी बीमारियां केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध देश की उत्पादकता, जनसांख्यिकी और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा हुआ है।
डॉ. सिंह ने इंडियन थायरॉयड सोसायटी के सम्मेलन में मौजूद एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स को संबोधित करते हुए चिकित्सक समुदाय से थायरॉयड के प्रति जागरूकता बढ़ाने, शोध सहयोग को मजबूत करने और समय रहते बीमारी की पहचान पर जोर देने की अपील की। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में थायरॉयड रोग, खासकर हाइपोथायरॉयडिज्म, बिना पहचान के रह जाते हैं, जिससे लोगों की ऊर्जा क्षमता, कार्यक्षमता और दीर्घकालिक उत्पादकता प्रभावित होती है। ऐसे देश में, जहां 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम उम्र की है, यह चिंता का विषय है।
डॉ. सिंह ने बताया कि भारत में लगभग 4.2 करोड़ लोग थायरॉयड विकारों से पीड़ित हैं और इस समस्या की व्यापकता को देखते हुए इसके अनुरूप शोध और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि थायरॉयड जैसी बड़ी चिकित्सा चुनौती को किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसके लिए जीवन विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान और अन्य सहयोगी क्षेत्रों के बीच मजबूत बहु-विषयक समन्वय और व्यापक सामाजिक जागरूकता जरूरी है।
मंत्री ने बताया कि हाइपोथायरॉयडिज्म लगभग 11 प्रतिशत वयस्कों को प्रभावित करता है और बड़ी संख्या में मरीजों का अब तक निदान नहीं हो पाया है। गर्भावस्था के दौरान यदि हाइपोथायरॉयडिज्म की पहचान न हो, तो इससे बच्चों में जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म और अपरिवर्तनीय न्यूरो-डेवलपमेंटल नुकसान हो सकता है।
डॉ. सिंह ने बायोफार्मा शक्ति मिशन, भारत की जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना तथा एक लाख करोड़ रुपये के रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फ्रेमवर्क का भी उल्लेख किया, जिसमें निजी और परोपकारी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने भारत की जैव प्रौद्योगिकी उपलब्धियों का हवाला देते हुए कहा कि देश ने एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमणों के खिलाफ पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक विकसित की है, हीमोफीलिया के लिए जीन थेरेपी के सफल परीक्षण किए हैं और कोविड-19 महामारी के दौरान डीएनए वैक्सीन का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया।
--आईएएनएस
डीएससी
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