पाकिस्तान का दमन और हाशियाकरण बना बलूचिस्तान विद्रोह की जड़: रिपोर्ट

पाकिस्तान का दमन और हाशियाकरण बना बलूचिस्तान विद्रोह की जड़: रिपोर्ट

पाकिस्तान का दमन और हाशियाकरण बना बलूचिस्तान विद्रोह की जड़: रिपोर्ट

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IANS
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After Sunday’s suicide bombing, BLA threatens more attacks on Pak Army, Chinese in next 90 days

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

क्वेटा, 2 फरवरी (आईएएनएस)। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हाल के हमले, जिन्हें ऑपरेशन हीरोफ फेज 2.0 के तहत अंजाम दिया गया, पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे बलूचिस्तान संघर्ष में तेजी को दर्शाते हैं।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 जनवरी को क्वेटा, ग्वादर और चागई जैसे खनिजों से समृद्ध क्षेत्रों समेत 14 शहरों और 48 स्थलों पर हमलों की जिम्मेदारी बीएलए ने ली। दोनों पक्षों में हताहतों की संख्या को लेकर बयानबाजी रही; पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार दर्जनों लड़ाके मारे गए, जबकि बीएलए ने सुरक्षा बलों पर भारी नुकसान का दावा किया।

डैनियल कपलान ने वन वर्ल्ड आउटलुक में लिखे अपने विचार में कहा कि इस सशस्त्र प्रतिरोध में अचानक उभार किसी शून्य से नहीं आया। यह दशकों से बलूच लोगों पर पाकिस्तान की लगातार सरकारों द्वारा किए गए प्रणालीगत उत्पीड़न, हाशिए पर डालने और दमन का कड़वा परिणाम है। यह अलग-थलग उग्रवाद नहीं बल्कि शासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है, जिसमें शोषण, जबरन गायब करना, न्याय से परे हत्या और शांतिपूर्ण विरोध का दमन शामिल है, जिसने पीढ़ियों को कट्टरपंथी बना दिया और संवाद या न्याय पर भरोसा समाप्त कर दिया।

बलूचिस्तान पाकिस्तान के सबसे गरीब और कम विकसित क्षेत्रों में से एक है, जबकि यह सोना, तांबा और प्राकृतिक गैस जैसे खनिजों में समृद्ध है। रेको दीक और सैंदक जैसे परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय निवासियों को लाभ बहुत कम मिला। संसाधनों का निष्कर्षण बिना लाभांश या स्थानीय भागीदारी के किया जाता है, जिससे लोगों में यह भावना बनी है कि उनकी प्रांत को इस्लामाबाद और विदेशी पूंजी के लिए औपनिवेशिक ऑउटपोस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। भारी सैन्यकरण और निवेश की सुरक्षा पर जोर देने से स्थानीय लोगों की सुरक्षा और अधिकार और कमजोर हुए हैं।

कपलान ने लिखा, विद्रोह का मुख्य कारण जबरन गायब करने की नीति है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर अपराध है। 2000 के दशक की शुरुआत से हजारों लोग लापता हो चुके हैं। पाकिस्तान की जबरन गायब मामलों की आयोग ने हजारों मामले दर्ज किए हैं, लेकिन किसी को जवाबदेह नहीं ठहराया गया।

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी दस्तावेजीकृत किया है कि सुरक्षा बल सक्रियताओं, छात्रों, पत्रकारों और आम नागरिकों को अगवा करते हैं और अक्सर उन्हें शारीरिक यातना देकर या न्याय के बिना मार देते हैं। शवों को यातना के निशानों के साथ फेंक दिया जाता है, जिसे किल एंड डंप कहा जाता है। 2025 में संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान में इस तरह की गुमशुदगी की लगातार होने की निंदा की और स्वतंत्र जांच और अपराध के रूप में इसे मान्यता देने की अपील की, जिसे बार-बार अनदेखा किया गया।

बलूचिस्तान में हाल के वर्षों में हिंसा और विद्रोह बढ़े हैं। 2025 में छात्र हयात बलूच की सुरक्षा बलों द्वारा हत्या से स्थानीय निवासियों में आक्रोश भड़का। 2023 में ग्वादर में हक दो तेहरिक के विरोध प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने कड़ी कार्रवाई की, जिसमें इंटरनेट शटडाउन भी शामिल था। 2024 के चुनावों को व्यापक रूप से भ्रष्ट और धांधलीपूर्ण माना गया, जिससे बलूचिस्तान के लोग और अलग-थलग हो गए।

मार्च 2025 में प्रमुख बलूच यकजती समिति (बीवाईसी) नेता माहरंग बलूच को विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। तब से माहरंग बलूच हिरासत में हैं और उनके खिलाफ कई आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, साथ ही हिरासत में उनके साथ दुर्व्यवहार की भी रिपोर्टें हैं। माहरंग बलूच और अन्य मामलों से स्पष्ट होता है कि राज्य जवाबदेही की मांग करने वाली आवाज़ों को दबा रहा है, जिससे अधिक लोग सशस्त्र संघर्ष की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें महिलाएं भी ऑपरेशन हीरोफ फेज 2.0 में भाग ले रही हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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