'सॉवरेन एआई से होगा देश की वास्तविक चुनौतियों पर नियंत्रण और उनका समाधान'

'सॉवरेन एआई से होगा देश की वास्तविक चुनौतियों पर नियंत्रण और उनका समाधान'

'सॉवरेन एआई से होगा देश की वास्तविक चुनौतियों पर नियंत्रण और उनका समाधान'

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IANS
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Sovereign AI holds control, solutions for India’s real challenges, says policymakers

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन मंगलवार को वरिष्ठ नीति-निर्माताओं ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में सॉवरेनिटी यानी आत्मनिर्भरता से भारत को यह नियंत्रण मिलेगा कि एआई सिस्टम कैसे बनाए जाएं, कैसे लागू किए जाएं और कैसे संचालित किए जाएं। उन्होंने कहा कि इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और वित्तीय समावेशन जैसी वास्तविक चुनौतियों का समाधान किया जा सकेगा, ताकि नागरिक अपनी ही भाषाओं में सेवाओं का लाभ उठा सकें।

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आधिकारिक बयान के अनुसार, नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के महानिदेशक और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि सॉवरेन एआई का मतलब अलग-थलग होकर काम करना नहीं है। उनके अनुसार, सॉवरेन एआई से नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

भारतजेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऋषि बाल ने कहा कि एआई को चरणबद्ध तरीके से अपनाया जाना चाहिए और इसकी शुरुआत शासन, नागरिक सेवाओं और वित्त जैसे प्राथमिक क्षेत्रों से होनी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि साझा डिजिटल ढांचा और सामान्य मॉडल तेज और सुरक्षित नवाचार को बढ़ावा देंगे।

उन्होंने आगे कहा कि एआई सॉवरेनिटी के लिए ऐसे राष्ट्रीय मॉडल और बुनियादी ढांचे का निर्माण जरूरी है, जिनका व्यापक रूप से उपयोग किया जा सके। साथ ही, स्टार्टअप्स को भी नवाचार के अवसर मिलें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा इकोसिस्टम पूरे देश में आपसी सहयोग से ही तैयार किया जा सकता है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने ये बातें स्केलिंग इम्पैक्ट फ्रॉम इंडिया’स सॉवरेन एआई एंड डेटा नामक सत्र में कही। इस सत्र में इस बात पर चर्चा हुई कि भारत केवल एआई का उपभोक्ता बनकर न रहे, बल्कि वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण एआई सिस्टम का निर्माता भी बने।

चर्चा में गहन शोध प्रतिभा और दीर्घकालिक नवाचार निवेश की कमी को दूर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। पैनल ने कहा कि असली एआई क्षमता अल्पकालिक उपायों से नहीं, बल्कि मजबूत शोध व्यवस्था और बेहतर मार्गदर्शन से विकसित होती है।

सत्र में उन्नत एआई शोध को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे वित्तीय समावेशन, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि एआई को भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, ताकि इसके परिणाम सार्थक और समावेशी हों।

पांच दिन तक चलने वाला यह समिट 20 फरवरी को समाप्त होगा। इस समिट में 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और उपमंत्री शामिल हैं। इसके अलावा 500 से अधिक वैश्विक एआई विशेषज्ञ, जिनमें सीईओ, संस्थापक, शिक्षाविद, शोधकर्ता, सीटीओ और परोपकारी संस्थाएं भी भाग ले रही हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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