दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून को उम्रकैद की सजा, मार्शल लॉ के मामले में हुई कार्रवाई

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून को उम्रकैद की सजा, मार्शल लॉ के मामले में हुई कार्रवाई

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून को उम्रकैद की सजा, मार्शल लॉ के मामले में हुई कार्रवाई

author-image
IANS
New Update
Seoul: Yoon Suk Yeol Sentenced in Martial Law Case

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

सोल, 19 फरवरी (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सूक येओल को 2024 में मार्शल लॉ लगाने की नाकाम कोशिश के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। गुरुवार को सोल की एक अदालत ने फैसला सुनाया।

Advertisment

योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि इस केस पर पहले फैसले में, सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यून को मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का दोषी ठहराया। हालांकि, विशेष अभियोजक ने अपील की थी कि मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई जाए।

कोर्ट ने साफ किया कि पूर्व राष्ट्रपति की ओर से दिया गया मार्शल लॉ का आदेश बगावत के बराबर था। यून ने संसदीय क्षेत्र में सेना भेजकर नेशनल असेंबली को कमजोर करने की कोशिश की थी।

आदेश में इस बात पर ज्यादा जोर दिया कि यून का नेशनल असेंबली में सेना भेजना ही केस की जड़ है। सुनवाई के दौरान जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति को पेश किया गया। इस सुनवाई का सीधा प्रसारण नेशनल टेलीविजन पर किया गया।

पिछले साल जनवरी में यून पर 3 दिसंबर, 2024 को छह घंटे तक चले मार्शल लॉ के जरिए बगावत करने का आरोप लगाया गया था। आरोप के मुताबिक, यून ने पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून और दूसरों के साथ मिलकर संविधान को नुकसान पहुंचाने के मकसद से दंगा करने की साजिश रची और युद्ध या वैसी ही कोई नेशनल इमरजेंसी न होने पर भी गैरकानूनी तरीके से मार्शल लॉ घोषित कर दिया।

पिछले महीने ट्रायल की आखिरी सुनवाई के दौरान, स्पेशल वकील चो यून-सुक की टीम ने पूर्व राष्ट्रपति के लिए मौत की सजा की मांग की थी और कहा कि वह न्यायपालिका और विधायिका पर कब्जा करके लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के मकसद से मार्शल लॉ घोषित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा सजा के हकदार हैं।

टीम ने कहा, जुर्म की प्रकृति गंभीर है क्योंकि उन्होंने ऐसे फिजिकल रिसोर्स जुटाए जिनका इस्तेमाल सिर्फ देश के हित में होना चाहिए था। यून ने अपने आखिरी बयान में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा था कि राष्ट्रपति के संवैधानिक स्टेट इमरजेंसी अधिकार का इस्तेमाल बगावत नहीं हो सकता।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Advertisment