यूरोपीय फोरम में मुनीर को निमंत्रण मिलने पर भड़के सिंधी नेता, बोले- ये दबे-कुचले लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कना है

यूरोपीय फोरम में मुनीर को निमंत्रण मिलने पर भड़के सिंधी नेता, बोले- ये दबे-कुचले लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कना है

यूरोपीय फोरम में मुनीर को निमंत्रण मिलने पर भड़के सिंधी नेता, बोले- ये दबे-कुचले लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कना है

author-image
IANS
New Update
Rubbing salt into wounds of oppressed: Sindhi leader on European forums’ invite to Asim Munir

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

बर्लिन, 14 फरवरी (आईएएनएस)। जेय सिंध मुत्तहिदा महाज (जेएसएमएम) के चेयरमैन शफी बुरफत ने पूरे यूरोप में ग्लोबल सिक्योरिटी फोरम में पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर की मौजूदगी की निंदा की। जेएसएमएम चेयरमैन ने इसे दक्षिण एशियाई देश में दमन और कब्जे का सामना कर रहे समुदायों का अपमान बताया।

Advertisment

सिंधी नेता ने इस बात पर जोर दिया कि मुनीर ने पाकिस्तानी राजनीति, न्यायतंत्र, बिजनेस और मीडिया को असरदार तरीके से सैन्य वर्चस्व के नीचे डाल दिया है और इसलिए वह शांति को भरोसे के साथ नहीं दिखा सकते।

बुरफत ने कहा, “जर्मनी और यूरोप जैसे देशों में होने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मुनीर की मौजूदगी उन समुदायों का अपमान है, जिन्हें पाकिस्तान में दबाया और प्रताड़ित किया जा रहा है। यह उन पीड़ित लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है जो जुल्म सह रहे हैं।”

बुरफत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “पाकिस्तान के तथाकथित खुद को फील्ड मार्शल कहने वाले और खराब आर्मी चीफ, असीम मुनीर, पाकिस्तान के अंदर सिंधियों, बलूचों और पश्तूनों समेत जबरन गुलाम बनाए गए देशों पर सिस्टमैटिक जुल्म, जबरदस्ती गायब करने, टॉर्चर करने और बिना कानूनी कार्रवाई के हत्याओं में गहराई से शामिल हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “राजनीतिक कार्यकर्ताओं को किडनैप किया जाता है, बेरहमी से टॉर्चर किया जाता है और डर का माहौल बनाने के लिए उनके कटे-फटे शरीर को फेंक दिया जाता है। उनके कमांड में मानवाधिकार का बड़ा उल्लंघन जारी है। वही मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट जिसने पूरे इलाके में धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद को बढ़ावा दिया है, अब इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर अपनी पहचान बनाना चाहता है।”

संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय यूनियन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समेत वैश्विक समुदाय को लिखे एक लेटर में बुरफत ने 13-15 फरवरी को होने वाले म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान की मिलिट्री लीडरशिप को शामिल करने पर नैतिक आपत्ति जताई।

बुरफत ने बताया कि सिंध, बलूचिस्तान और दूसरे इलाकों समेत पूरे इलाके राजनीतिक दबाव, सांस्कृतिक भेदभाव और आर्थिक बहिष्कार से जुड़ी शिकायतें लगातार रिपोर्ट कर रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के ओसामा बिन लादेन को पनाह देने से देश की इंटरनेशनल साख को काफी नुकसान हुआ है और काउंटरटेररिज्म कमिटमेंट्स को लेकर ग्लोबल चिंताएं बढ़ी हैं।

बुरफत ने कहा, “यह घटना पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और इंटरनेशनल जिम्मेदारियों पर बहस का एक अहम हिस्सा बनी हुई है। इस ऐतिहासिक और राजनीतिक रिकॉर्ड को देखते हुए, लोगों को यह बहुत परेशान करने वाला है कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को ग्लोबल शांति और सुरक्षा के लिए समर्पित एक फोरम में बुलाया जा रहा है।”

बुरफत ने कहा कि म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस, जो मानवीय सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने की कोशिश करती है, उसे पाकिस्तानी सेना द्वारा चल रहे ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन को देखते हुए इस्लामाबाद के शामिल होने के असर पर ध्यान से सोचना चाहिए।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Advertisment