पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग अब भी राजनीतिक दमन और बुनियादी ढांचे के अभाव से जूझ रहे

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग अब भी राजनीतिक दमन और बुनियादी ढांचे के अभाव से जूझ रहे

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग अब भी राजनीतिक दमन और बुनियादी ढांचे के अभाव से जूझ रहे

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IANS
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LoC dividing Jammu and Kashmir and PoJK evolved into developmental fault line: Report

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 4 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) को अलग करने वाली नियंत्रण रेखा (एलओसी) अब केवल एक सैन्य सीमा नहीं रह गई है, बल्कि यह विकास की दृष्टि से एक गहरी खाई का रूप ले चुकी है। जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संरचनात्मक बदलाव और आर्थिक पुनरुत्थान देखने को मिला है, वहीं पीओजेके और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) आज भी राजनीतिक दमन और बुनियादी ढांचे के क्षरण में फंसे हुए हैं। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है।

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इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक इस क्षेत्र की पहचान केवल संघर्ष के नजरिये से की जाती रही, लेकिन ‘विकास के युग’ का विश्लेषण एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है। 1947 के विभाजन के बाद शासन के दो अलग-अलग रास्ते बने—एक भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के तहत, जिसने समावेशन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच को प्राथमिकता दी, जबकि दूसरा पाकिस्तान के कब्जे में रहा, जहां शोषण और ठहराव की स्थिति बनी रही।

रिपोर्ट में कहा गया है, “2026 में खड़े होकर आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि जहां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संरचनात्मक बदलाव और आर्थिक पुनर्जीवन हो रहा है, वहीं पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान राजनीतिक दमन और बुनियादी ढांचे की बदहाली के चक्र में फंसे हुए हैं।”

2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पुनर्गठन को बेहतर शासन की दिशा में कदम बताया। 2020 में जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव और 2024 में विधानसभा चुनाव क्षेत्र में प्रतिनिधि शासन की बहाली के अहम कदम रहे। इसके साथ ही आयुष्मान भारत और पीएम किसान जैसी कल्याणकारी योजनाएं पूरे क्षेत्र के हर जिले में लागू की गईं।

इसके उलट, पीओजेके अब भी 1974 के अंतरिम संविधान के तहत संचालित हो रहा है, जिसमें सीमित स्वशासन की ही व्यवस्था है, जबकि रक्षा और विदेश नीति जैसे अहम विषय पूरी तरह पाकिस्तान के नियंत्रण में हैं। पीओजीबी की स्थिति और भी गंभीर है। 2009 के ‘एम्पावरमेंट एंड सेल्फ गवर्नेंस ऑर्डर’ के बावजूद इस क्षेत्र को अब तक पाकिस्तान में संवैधानिक दर्जा नहीं मिला है। इस व्यवस्थागत उपेक्षा के चलते वहां गेहूं की कीमतों, बिजली दरों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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