सरकार की निष्क्रियता के बीच पाकिस्तान में ईसाई उत्पीड़न का शिकार: रिपोर्ट

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सरकार की निष्क्रियता के बीच पाकिस्तान में ईसाई उत्पीड़न का शिकार: रिपोर्ट

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IANS
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Pakistan: Christian youth dies from abandonment, institutional cruelty (File image)

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

इस्लामाबाद, 30 जनवरी (आईएएनएस)। वैश्विक ईसाई अधिकार संगठन ओपन डोर्स द्वारा जारी वर्ल्ड वॉच लिस्ट 2026 में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में ईसाई समुदाय आज भी व्यवस्थित भेदभाव, हिंसा, जबरन धर्मांतरण, बंधुआ मजदूरी और लैंगिक उत्पीड़न का सामना कर रहा है, जबकि राज्य की ओर से उन्हें न्यूनतम संरक्षण ही मिल पा रहा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, ईसाइयों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों की सूची में पाकिस्तान लगातार शीर्ष 10 में बना हुआ है। ओपन डोर्स वर्ल्ड वॉच लिस्ट 2026 में पाकिस्तान को 8वां स्थान दिया गया है, जहां 50 देशों में ईसाइयों पर हो रहे उत्पीड़न का आकलन किया गया है।

यूरेशिया रिव्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, 27 जनवरी 2026 को ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय संसद में एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम के दौरान वर्ल्ड वॉच लिस्ट प्रस्तुत की गई। इस कार्यक्रम की मेजबानी धार्मिक स्वतंत्रता इंटरग्रुप की अध्यक्ष एमईपी मिरियम लेक्समैन (ईपीपी) और एमईपी बर्ट-जान रुइसेन (ईसीआर) ने की, जबकि एमईपी माटेज़ टोनिन (ईपीपी) सह-मेजबानी से जुड़े रहे।

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र में पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता जोसेफ जान्सन ने कानूनों के बावजूद धार्मिक अल्पसंख्यकों की लगातार असुरक्षा की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने कहा कि मई 2025 में पाकिस्तान की संसद द्वारा इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट पारित कर विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तय किए जाने के बावजूद, अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण, जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तन और अपहरणकर्ताओं से शादी कराए जाने की घटनाएं जारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बजाय अदालतें अक्सर नागरिक कानून की जगह शरिया कानून लागू करती हैं।

जान्सन ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि झूठे आरोपों के जरिए ईसाइयों को निशाना बनाया जाता है, जिससे भीड़ हिंसा, चर्चों पर हमले और वर्षों तक न्याय के बिना कारावास जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। उन्होंने 2023 के जरनवाला हमलों का उल्लेख किया, जहां कम से कम 26 चर्च जला दिए गए थे, लेकिन अब तक किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सरकार द्वारा तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) जैसे कट्टरपंथी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न किए जाने से स्थिति और बिगड़ रही है। जान्सन के अनुसार, धार्मिक कैदी अब भी जेलों में बंद हैं, पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है और दंडमुक्ति का माहौल बना हुआ है।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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