पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में मानवीय संकट, संघीय और प्रांतीय सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में मानवीय संकट, संघीय और प्रांतीय सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में मानवीय संकट, संघीय और प्रांतीय सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

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IANS
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Pakistan's govt and Khyber Pakhtunkhwa govt blame game over Tirah Valley exposes divergence on counter-terrorism policy: Report

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

इस्लामाबाद, 30 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की संघीय सरकार और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) सरकार के बीच तिराह घाटी को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप ने आतंकवाद-रोधी नीति पर दोनों के बीच गहरे मतभेद उजागर कर दिए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस राजनीतिक टकराव का फायदा राष्ट्र-विरोधी तत्वों को मिल सकता है, जबकि कड़ाके की ठंड में अपने पैतृक इलाकों से पलायन को मजबूर स्थानीय लोगों की परेशानियां और बढ़ रही हैं।

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पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के एक संपादकीय में कहा गया है कि तिराह घाटी लंबे समय से राज्य की पकड़ के लिहाज से एक संवेदनशील और अशांत क्षेत्र रही है। अखबार के अनुसार, अफगानिस्तान से सटी यह घाटी कई प्रतिबंधित आतंकी संगठनों का गढ़ बन चुकी है। इनमें इस्लामिक स्टेट-खोरासान (आईएस-के), लश्कर-ए-इस्लाम और जमात-उल-अहरार जैसे संगठन शामिल बताए गए हैं।

अखबार ने लिखा कि आतंकियों का सफाया करना संघीय सरकार का अधिकार और दायित्व है, वहीं प्रांतीय सरकार, जो प्रदेश की जनता की प्रतिनिधि है, उसे भी वास्तविक चिंताओं को उठाने और केंद्र की कार्रवाइयों में हस्तक्षेप करने का अधिकार है। हालांकि, एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर केंद्र और प्रांतीय सरकार का एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर आ जाना जिम्मेदाराना रवैया नहीं कहा जा सकता।

संपादकीय में कहा गया, “मानवीय संकट का रूप लेती इस स्थिति से निपटने के लिए सहयोग और समन्वय की जरूरत है, लेकिन इसके बजाय दोनों सरकारें एक-दूसरे पर दोष मढ़ रही हैं। इससे आतंकवाद-रोधी नीति को लेकर राज्य स्तर पर मतभेद उजागर हो रहे हैं, जिसका सीधा फायदा राष्ट्र-विरोधी तत्वों को मिलेगा और भीषण सर्दी व जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच विस्थापित लोगों की तकलीफें बढ़ेंगी।”

संघीय सरकार का दावा है कि तिराह घाटी में मौसमी पलायन हो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वे खानाबदोश नहीं हैं और संघर्ष की वजह से सुरक्षित इलाकों की ओर भागने को मजबूर हुए हैं। अखबार ने सुझाव दिया कि राज्य और केंद्र सरकार को पलायन कर रहे लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें सुरक्षित यात्रा, उचित आश्रय, भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, जब तक हालात सामान्य न हो जाएं और वे अपने घरों को लौट न सकें।

इससे पहले इसी सप्ताह आई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तान की घरेलू और विदेश नीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाली पाकिस्तानी सेना पर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में व्यापक मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप हैं। यह इलाका 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान पर हमले के बाद से उग्रवाद और दर्जनों सैन्य अभियानों से प्रभावित रहा है।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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