पाकिस्तान: 27वें संविधान संशोधन का बलूचिस्तान पर गंभीर असर

पाकिस्तान: 27वें संविधान संशोधन का बलूचिस्तान पर गंभीर असर

पाकिस्तान: 27वें संविधान संशोधन का बलूचिस्तान पर गंभीर असर

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IANS
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Rights advocates warn Pakistan's 27th Constitutional Amendment's impact severe in Balochistan

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

बर्लिन, 30 जनवरी (आईएएनएस)। जर्मनी के बर्लिन में विश्लेषकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान में पारित 27वां संविधान संशोधन न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करेगा और कार्यपालिका की शक्ति को बढ़ाएगा। इससे पहले से ही मानवाधिकार उल्लंघनों और राजनीतिक हाशियेकरण का सामना कर रहे लोगों के लिए कानूनी संरक्षण और भी कम हो जाएगा, स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी।

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द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस विषय पर आयोजित चर्चा में राजनीतिक विश्लेषक रफीउल्लाह काकर और ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान के कार्यकारी निदेशक अब्दुल्ला अब्बास ने भाग लिया। चर्चा का संचालन बीबीसी की पूर्व संवाददाता सहर बलोच ने किया।

इस दौरान अब्बास ने कहा कि इस संशोधन का सबसे गंभीर प्रभाव बलूचिस्तान में पड़ेगा, जहां मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और फर्जी मुठभेड़ों के मामलों का दस्तावेजीकरण किया है।

उन्होंने कहा, “यह कानून पूरे पाकिस्तान पर लागू होता है, लेकिन बलूचिस्तान एक अलग और विशेष मामला है। वर्षों से असहमति के खिलाफ अमानवीयकरण और राज्य-प्रायोजित नैरेटिव ने सबसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को संभव बनाया है और कई बार उन्हें जायज़ ठहराया है।”

अब्बास ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान में संविधान व्यावहारिक रूप से लगभग अस्तित्वहीन है। “27वें संशोधन के साथ, कानूनी राहत की जो थोड़ी-बहुत उम्मीद बची थी, वह भी खत्म की जा रही है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के आतंकवाद-रोधी कानून (एंटी-टेरिज्म एक्ट) में किए गए संशोधनों के जरिए जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को प्रभावी रूप से वैधता दी जा रही है। अब्बास ने कहा, “चीन ने उइगरों के साथ कानून और निगरानी के जरिए जो किया, वही अब बलूचिस्तान में दोहराया जा रहा है,” और इसे उन्होंने “दमन के संस्थानीकरण” की संज्ञा दी।

वहीं, रफीउल्लाह काकर ने कहा कि यह संशोधन न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंधों को “मूल रूप से बदल देता है”, क्योंकि इससे अदालतों की कार्यपालिका के फैसलों की समीक्षा या चुनौती देने की शक्ति सीमित हो जाएगी।

--आईएएनएस

डीएससी

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