मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नाकामी दिखाता है : कनाडा पीएम

मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नाकामी दिखाता है : कनाडा पीएम

मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नाकामी दिखाता है : कनाडा पीएम

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IANS
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Middle East conflict shows failure of global order, says Canadian PM

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

वाशिंगटन, 4 मार्च (आईएएनएस)। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नाकामी को दिखाता है। उनका कहना है कि कई दशकों से चल रही कूटनीति और प्रतिबंध भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में सफल नहीं हो पाए हैं।

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मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में विदेश दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कार्नी ने कहा कि मौजूदा संकट यह दिखाता है कि वर्षों की बातचीत और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद वैश्विक संस्थाएं ईरान को रोकने में संघर्ष करती रही हैं।

कार्नी ने कहा कि उन्हें इस स्थिति पर अफसोस है, लेकिन मौजूदा संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विफलता का एक और उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि कई सालों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन इन प्रयासों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिला।

कार्नी के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्ताव पारित किए गए, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने लगातार निगरानी और काम किया, साथ ही कई तरह के प्रतिबंध और कूटनीतिक प्रयास भी किए गए। इसके बावजूद ईरान से जुड़ा परमाणु खतरा बना हुआ है।

उन्होंने दोहराया कि कनाडा लंबे समय से ईरान को मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने वाला प्रमुख कारण मानता रहा है।

कार्नी ने कहा कि ईरान की सरकार और उससे जुड़े समूहों ने क्षेत्र में भारी नुकसान और तकलीफ पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, जिनमें कनाडा के नागरिक भी शामिल हैं, और मध्य पूर्व सहित कई क्षेत्रों में लाखों लोगों को तकलीफ झेलनी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि कनाडा उन प्रयासों का समर्थन करता है जिनका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है।

कार्नी ने कहा, हम ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने और उसकी सरकार को इंटरनेशनल शांति और सिक्योरिटी के लिए और खतरा बनने से रोकने की कोशिशों का सपोर्ट करते हैं।

साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि हाल की तनातनी कैसे हुई। उन्होंने कहा, और अब यूनाइटेड स्टेट्स और इजरायल ने यूनाइटेड नेशंस से बातचीत किए बिना या कनाडा समेत अपने साथियों से सलाह किए बिना काम किया है।

कार्नी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लड़ाई में शामिल सभी पक्षों के काम इंटरनेशनल कानून के हिसाब से होने चाहिए। उन्होंने कहा, “कनाडा इस बात को फिर से मानता है कि इंटरनेशनल कानून सभी देशों के लिए जरूरी है।”

उन्होंने पूरे इलाके में आम लोगों के ठिकानों पर ईरान के हमलों की निंदा की।

उन्होंने कहा, “हम मिडिल ईस्ट में आम लोगों और आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरान के हमलों की निंदा करते हैं।”

उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की भी अपील की। उन्होंने कहा, “हम अमेरिका और इजरायल समेत सभी पक्षों से इंटरनेशनल बातचीत के नियमों का सम्मान करने की अपील करते हैं। कनाडा दुश्मनी को तेज़ी से कम करने की अपील करता है और इस लक्ष्य को पाने में मदद करने के लिए तैयार है।”

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस संकट को खत्म करने के लिए डिप्लोमेसी ही एकमात्र सही रास्ता है।

उन्होंने कहा, “एक बड़े और गहरे झगड़े से बचने के लिए डिप्लोमैटिक बातचीत जरूरी है। बेगुनाह आम लोगों की रक्षा की जानी चाहिए, और सभी पक्षों को न्यूक्लियर प्रोलिफरेशन और आतंकवादी कट्टरपंथ दोनों को खत्म करने के लिए पक्के समझौते करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।”

मध्य पूर्व में तनाव हाल के सैन्य हमलों के बाद और बढ़ गया है। इन हमलों में ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया गया, जिसके बाद क्षेत्र में जवाबी कार्रवाइयां भी तेज हो गईं। इससे वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार को लेकर चिंता बढ़ गई है।

--आईएएनएस

एएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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