बांग्लादेश: अवामी लीग नेताओं की जमानत पर कोर्ट में वकीलों का हंगामा, मानवाधिकार संगठन ने जताई नाराजगी

बांग्लादेश: अवामी लीग नेताओं की जमानत पर कोर्ट में वकीलों का हंगामा, मानवाधिकार संगठन ने जताई नाराजगी

बांग्लादेश: अवामी लीग नेताओं की जमानत पर कोर्ट में वकीलों का हंगामा, मानवाधिकार संगठन ने जताई नाराजगी

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IANS
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Lawyers at B'desh court engaged in misconduct after bail grant to Awami League leaders: Rights body

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

पेरिस, 25 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के बारिशाल जिले की एक अदालत में अवामी लीग के कई नेताओं को जमानत दी गई। जिसके बाद कथित तौर पर परिसर में ही कुछ वकीलों ने बदसलूकी की। ऐसा एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन का कहना है और उसने इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की है।

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पेरिस स्थित जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (जेएमबीएफ) ने इस घटना को लोकतंत्र, कानून के शासन और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है।

जेएमबीएफ ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जुड़े वकीलों का व्यवहार निंदनीय था। वे बेंच पर धक्का-मुक्की कर रहे थे, जबरदस्ती कोर्टरूम में प्रवेश कर रहे थे और जज के साथ भी उनका बर्ताव सराहनीय नहीं था। वकील उन पर चिल्ला रहे थे और उनकी ओर उंगली दिखा रहे थे।

यह घटना मंगलवार को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एस. एम. शरियत उल्लाह की अदालत में हुई।

जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने बयान में कहा, यह घटना न्यायपालिका की स्वतंत्रता, गरिमा और सुरक्षा पर सवाल उठाती है।

उन्होंने कहा कि असहमति होने पर अपील या उच्च अदालत में चुनौती देने के बजाय कोर्ट को युद्ध का मैदान बनाना अवमानना है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। ये वकील बिना अपील या किसी सही प्रक्रिया को अपनाए जज पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे। कुल मिलाकर ये न्याय को प्रभावित करने की कोशिश थी।

संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के हाई कोर्ट डिवीजन के जस्टिस की अगुवाई में एक न्यायिक जांच आयोग गठित करने की मांग की है, ताकि दोषियों की पहचान कर पारदर्शी तरीके से सजा दी जा सके।

जेएमबीएफ ने कहा कि कोर्टरूम में गैर-कानूनी तरीके से घुसना, बेंच पर मारपीट करना, जज पर उंगली उठाना और चिल्लाना, और न्यायिक कार्रवाई में रुकावट डालना साफ तौर पर कोर्ट की अवमानना है और ये सजा के लायक अपराध हैं जिनसे उसी हिसाब से निपटना चाहिए।

मानवाधिकार संस्था ने कहा कि जरूरी है कि न्यायपालिका किसी भी तरह के मतभेद को कानूनी तरीके से निपटाए ताकि फैसले किसी के प्रभाव में आकर न सुनाए जाएं।

--आईएएनएस

केआर/

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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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