क्रेमलिन का बयान: रूस और अमेरिका ने परमाणु संधि पर बातचीत शुरू करने की जरूरत पर दिया जोर

क्रेमलिन का बयान: रूस और अमेरिका ने परमाणु संधि पर बातचीत शुरू करने की जरूरत पर दिया जोर

क्रेमलिन का बयान: रूस और अमेरिका ने परमाणु संधि पर बातचीत शुरू करने की जरूरत पर दिया जोर

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IANS
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Kremlin says Russia, US recognise need to start talks on nuclear treaty (File image)

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

मॉस्को, 6 फरवरी (आईएएनएस)। रूस और अमेरिका ने नई सामरिक हथियार कटौती संधि (न्यू स्टार्ट) पर जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। यह जानकारी शुक्रवार को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दी।

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पेस्कोव ने बताया कि यह मुद्दा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में हाल ही में हुई वार्ता के दौरान उठाया गया था, जहां दोनों पक्षों ने जिम्मेदार रुख अपनाने की जरूरत पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अबू धाबी में हुआ कामकाज रचनात्मक रहा, लेकिन साथ ही यह “काफी कठिन” भी था। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी। यह जानकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने दी।

बुधवार और गुरुवार को अबू धाबी में यूक्रेन मुद्दे पर त्रिपक्षीय वार्ता का दूसरा दौर आयोजित हुआ, जिसमें रूस, अमेरिका और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। इस दौरान रूस और यूक्रेन बड़े पैमाने पर कैदियों की अदला-बदली पर तो सहमत हुए, लेकिन क्षेत्रीय व्यवस्था और युद्धविराम जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।

दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के रूप में अमेरिका और रूस के पास वैश्विक परमाणु हथियारों का लगभग 87 फीसदी हिस्सा है। वर्ष 2011 में लागू हुई न्यू स्टार्ट संधि को 2021 में पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया था और इसे लंबे समय से द्विपक्षीय सामरिक स्थिरता की आधारशिला माना जाता रहा है। इस संधि के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1,550 तैनात रणनीतिक परमाणु वारहेड तक सीमित किया गया था। साथ ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों, पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों और भारी बमवर्षकों जैसी हथियार प्रणालियों पर भी पाबंदियां तय की गई थीं।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर न्यू स्टार्ट को “खराब तरीके से तय किया गया समझौता” बताते हुए कहा कि इसका “घोर उल्लंघन” हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि इस संधि को आगे बढ़ाना अमेरिका के हित में नहीं है।

इसके बजाय ट्रंप ने “नई, बेहतर और आधुनिक संधि” की मांग की, जो लंबे समय तक प्रभावी रह सके। इससे यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन मौजूदा ढांचे को बनाए रखने के बजाय उससे आगे बढ़ना चाहता है।

रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को पुष्टि की कि संधि की अवधि समाप्त होने के बाद वह यह मानता है कि दोनों पक्ष अब इस समझौते के तहत किसी भी दायित्व से बंधे नहीं हैं।

हथियार नियंत्रण समझौतों को लेकर ट्रंप का संदेह कोई नई बात नहीं है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (आईएनएफ) संधि से भी बाहर निकलने का फैसला किया था। उस समय भी यह तर्क दिया गया था कि यह समझौता मौजूदा रणनीतिक हालात को नहीं दर्शाता और प्रतिद्वंद्वियों पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहा है।

न्यू स्टार्ट के समाप्त होने के साथ ही वाशिंगटन और मॉस्को के बीच हथियार नियंत्रण से जुड़ा आखिरी सुरक्षा कवच भी खत्म हो गया है। इससे न केवल दोनों देशों के रिश्तों में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक रणनीतिक शून्य पैदा हो गया है। परमाणु हथियार नियंत्रण अब एक अनिश्चित दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां भू-राजनीतिक माहौल पहले से कहीं अधिक नाजुक और अस्थिर हो गया है।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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