विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों में तेजी के चलते जनवरी में औद्योगिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही

विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों में तेजी के चलते जनवरी में औद्योगिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही

विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों में तेजी के चलते जनवरी में औद्योगिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही

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IANS
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Surat: Diamond craftsmen at work

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने सोमवार को बताया कि जनवरी में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में साल-दर-साल आधार पर 4.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में 4.8 प्रतिशत और बिजली क्षेत्र में 5.1 प्रतिशत की बढ़त के कारण हुई।

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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का त्वरित अनुमान जनवरी 2025 में 161.6 के मुकाबले 169.4 पर है।

जनवरी 2026 में खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों के सूचकांक क्रमशः 157.2, 167.2 और 212.1 रहे।

विनिर्माण क्षेत्र के अंतर्गत एनआईसी 2 (राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण 2) के दो अंकीय स्तर पर 23 में से 14 उद्योग समूहों ने जनवरी 2026 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।

जनवरी 2026 में सबसे अधिक योगदान देने वाले तीन उद्योग समूह रहे - बुनियादी धातुओं का निर्माण (13.2 प्रतिशत), मोटर वाहनों, ट्रेलरों और सेमी-ट्रेलरों का निर्माण (10.9 प्रतिशत) और अन्य गैर-धात्विक खनिज उत्पादों का निर्माण (9.9 प्रतिशत)।

उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, जनवरी 2026 में प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक 167.9, पूंजीगत वस्तुओं का 124.4, मध्यवर्ती वस्तुओं का 182.8 और आधारभूत संरचना एवं निर्माण वस्तुओं का 227.7 रहा।

इसी प्रकार उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का सूचकांक 138.2 और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं का 160.7 दर्ज किया गया।

इससे पहले दिसंबर 2025 में भारत का औद्योगिक उत्पादन 7.8 प्रतिशत बढ़ा था, जो दो वर्षों से अधिक समय में सबसे ऊंचा स्तर था। यह वृद्धि विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों में व्यापक मजबूती के कारण हुई थी।

यह लगातार दूसरा महीना था जब औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इससे पहले नवंबर 2025 में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। उस महीने 23 में से 16 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दिखाई थी। शीर्ष तीन योगदानकर्ताओं में बुनियादी धातुओं का निर्माण, मोटर वाहन, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन उद्योग शामिल थे।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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