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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
मुंबई, 9 फरवरी (आईएएनएस)। देश में मत्स्य पालन ऋण योजनाओं के अंतर्गत (जून 2025 तक) 4.76 लाख किसान क्रेडिट कार्ड्स (केसीसी) के जरिए 3,214.32 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं और बीते 10 वर्षों में मछली उत्पादन दोगुना हो गया है। यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को दी गई।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष के तहत, जुलाई 2025 तक 6,369 करोड़ रुपए से अधिक के 178 ऋण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
मत्स्य क्षेत्र के लिए केसीसी को 2018-19 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत मछुआरे छोटी अवधि के लिए ऋण ले सकते हैं। इसमें ब्याज दर 7 प्रतिशत की होती है, लेकिन अगर समय से भुगतान किया जाए तो यह ब्याज दर घटकर 4 प्रतिशत हो सकती है।
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने बयान में कहा कि बैंकों द्वारा ऋण देने के जोखिम को और कम करने के लिए, एनएबी संरक्षण द्वारा प्रबंधित 750 करोड़ रुपए का क्रेडिट गारंटी कोष 12.5 करोड़ रुपए तक के बिना गारंटी वाले ऋणों को कवर करता है।
राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ने 12 राष्ट्रीयकृत बैंकों को अपने साथ जोड़ा है, हजारों आवेदनों पर कार्रवाई की है और दूरस्थ ऋण अनुरोधों को सक्षम बनाया है, जहां 19,000 से अधिक लाभार्थियों ने आवेदन किया है, जिनमें से 350 स्वीकृतियां और 15,000 रुपए से लेकर 5 करोड़ रुपए तक के ऋण वितरण शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 में मछली उत्पादन सर्वकालिक उच्च स्तर 197 लाख टन पर पहुंच गया, जो 2013-14 में 95.79 लाख टन से लगभग दोगुना है।
बयान में कहा गया कि सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 तक 220 लाख टन उत्पादन करना है, जिससे लगभग तीन करोड़ लोगों की आजीविका को सहारा मिलेगा और वित्त वर्ष 2025 में 62,408 करोड़ रुपए का निर्यात होगा, जिसमें फ्रोजन झींगे प्रमुख वस्तु होंगे और संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन प्रमुख बाजार होंगे।
यह क्षेत्र कृषि सकल मूल्य में 7.26 प्रतिशत का योगदान देता है, और प्रमुख मछली उत्पादों पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने जैसे नीतिगत उपायों से घरेलू खपत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा दोनों में सुधार हुआ है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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