नेपाल में सफल चुनाव पर भारत ने दी बधाई, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का किया स्वागत

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नेपाल में सफल चुनाव पर भारत ने दी बधाई, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का किया स्वागत

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IANS
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Kathmandu: Parliamentary Election

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में गुरुवार को हुए सफलतापूर्वक चुनाव का भारत ने स्‍वागत किया और नेपाल की सरकार, जनता तथा देश की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को बधाई दी।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, “नेपाल के नागरिकों ने आज अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उत्साहपूर्वक उपयोग किया। हम उनके सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न होने का स्वागत करते हैं। हम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की, नेपाल सरकार, नेपाल की जनता और विभिन्न हितधारकों को इन चुनावों के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हैं, जो पिछले वर्ष की असाधारण परिस्थितियों के बीच आयोजित किए गए।”

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत ने हमेशा नेपाल में शांति, प्रगति और स्थिरता का समर्थन किया है और अपनी वादे के अनुरूप नेपाल सरकार के अनुरोध पर इन चुनावों के लिए लॉजिस्टिक आपूर्ति भी प्रदान की है। हम नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर दोनों देशों और उनकी जनता के बीच मजबूत और बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने की आशा करते हैं, जिससे पारस्परिक लाभ हो।”

नेपाल में गुरुवार को संपन्न हुए संसदीय चुनाव बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए, हालांकि मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा।

कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि देशभर से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के आधार पर मतदान प्रतिशत लगभग 60 प्रतिशत होने का अनुमान है।

यदि अंतिम आंकड़े आने के बाद भी यह प्रतिशत नहीं बढ़ता है, तो यह 1991 के संसदीय चुनावों के बाद सबसे कम मतदान होगा। 2022 के चुनावों में मतदान प्रतिशत 61.41 प्रतिशत था। उन्होंने कहा क‍ि डिटेल डेटा इकट्ठा करना अभी भी जारी है।

उन्होंने कहा, “मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद, मतपेटियों को सुरक्षित रूप से एकत्रित करने के तुरंत बाद मतगणना शुरू कर दी जाएगी।”

निर्वाचन आयोग ने बताया कि 15 जिलों के दूरदराज क्षेत्रों से मतपेटियों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से लाया जाएगा।

आयोग के अनुसार, देश में कुल 1.89 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। कुछ मतदान केंद्रों पर लोगों ने चुनाव का बहिष्कार भी किया, क्योंकि वे विकास कार्यों में सरकार की विफलता से असंतुष्ट थे।

भंडारी ने कहा, “यह निर्वाचन आयोग से नाराज़गी नहीं है, बल्कि सरकार से है और सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।”

नेपाल में ये नए चुनाव निर्धारित समय से लगभग दो वर्ष पहले कराए गए। इसका कारण पिछले वर्ष सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन से उत्पन्न नई राजनीतिक स्थिति थी, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार को गिरा दिया था।

इसके बाद प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व में वर्तमान अंतरिम सरकार का गठन हुआ। प्रधानमंत्री बनने के बाद, जेन-जी नेताओं की मांग पर निचले सदन को भंग कर दिया गया और उन्हें छह महीने के भीतर नए चुनाव कराने का दायित्व दिया गया।

इन चुनावों में 1.89 करोड़ से अधिक लोग मतदान के पात्र थे, जिनमें 9,15,119 नए पंजीकृत मतदाता शामिल हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, नए पंजीकृत मतदाताओं में दो-तिहाई से अधिक जेन-जी आयु वर्ग के हैं, जिससे 2026 के चुनावों से पहले युवाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। ये चुनाव 23,112 मतदान केंद्रों पर आयोजित किए गए।

फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) प्रणाली के तहत 3,406 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जबकि 3,135 उम्मीदवार प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम के तहत चुनाव लड़ रहे हैं।

--आईएएनएस

एवाई/डीएससी

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