भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनने की क्षमता : एच.डी. कुमारस्वामी

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनने की क्षमता : एच.डी. कुमारस्वामी

भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनने की क्षमता : एच.डी. कुमारस्वामी

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IANS
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India can become leading global centre for electric mobility manufacturing: H.D. Kumaraswamy

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देश और उद्योग की मजबूत भागीदारी के साथ, भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के लिए एक अग्रणी वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी मजबूत स्थिति स्थापित कर सकता है। यह बयान केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी की ओर से दिया गया।

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एफआईसीसीआई नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के तीसरे सत्र के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने को प्रोत्साहित करने का जो भी सर्वोत्तम तरीका हो, हम उसे अपनाएंगे।

उन्होंने आगे कहा,‘विकसित भारत 2047’ के विजन की ओर बढ़ते हुए, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को ‘मेक इन इंडिया’ एजेंडा का केंद्र बिंदु बने रहना चाहिए, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिले, स्थानीयकरण को बढ़ावा मिले और भारत इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और महत्वपूर्ण घटकों के वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित हो सके।

पिछले एक दशक में, भारत के ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्यात लगभग दोगुने हो गए हैं, जो लगभग 8 अरब डॉलर से बढ़कर 16.9 अरब डॉलर हो गए हैं।

कुमारस्वामी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से कहा, यह वृद्धि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के बढ़ते एकीकरण और मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में इसकी बढ़ती विश्वसनीयता को दर्शाती है।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अगले दशक में ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने कार्यक्रम में कहा, “आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन हो रहा है और देश व्यापार के स्थानीयकरण और रणनीतिक निर्भरताओं पर पुनर्विचार कर रहे हैं। भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करनी चाहिए।”

जी20 के पूर्व शेरपा ने कहा, “इलेक्ट्रिक गतिशीलता केवल जलवायु के लिए अनिवार्य नहीं है; यह आर्थिक, औद्योगिक, तकनीकी और रणनीतिक रूप से भी एक बड़ा अवसर है। इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर संक्रमण को विकसित भारत 2047 का एक केंद्रीय स्तंभ माना जाना चाहिए।”

एफआईसीआई ग्रीन मोबिलिटी कमेटी के सह-अध्यक्ष विक्रम हांडा ने कहा कि ग्रीन मोबिलिटी 1.0 से अब 2.0 तक, भारत ने एक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का निर्माण किया है।

उन्होंने आगे कहा, इसमें महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण से लेकर सेल निर्माण, बैटरी पैक असेंबली और दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया, बस, ट्रक और यहां तक ​​कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का उत्पादन शामिल है। यह व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र भारतीय उद्योग की दिशा को दर्शाता है और भविष्य की अपार संभावनाओं को प्रतिबिंबित करता है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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