पाकिस्तान में ‘ऑनर किलिंग’ गंभीर मानवाधिकार संकट, सजा की दर बेहद कम: रिपोर्ट

पाकिस्तान में ‘ऑनर किलिंग’ गंभीर मानवाधिकार संकट, सजा की दर बेहद कम: रिपोर्ट

पाकिस्तान में ‘ऑनर किलिंग’ गंभीर मानवाधिकार संकट, सजा की दर बेहद कम: रिपोर्ट

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IANS
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Honour killings continue to emerge as serious human rights issue in Pakistan: Report

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

इस्लामाबाद, 16 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में ‘ऑनर किलिंग’ की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और यह देश में एक गंभीर मानवाधिकार मुद्दा बनता जा रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में ऑनर किलिंग के मामलों की संख्या अब भी अधिक है, जबकि दोषसिद्धि (सजा) की दर बेहद कम बनी हुई है।

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द एक्सप्रेस ट्रिब्यून मैगजीन में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि समय-समय पर ऑनर किलिंग की कुछ घटनाएं मीडिया में सुर्खियां बनती हैं, लेकिन व्यक्तिगत त्रासदियों से परे एक भयावह राष्ट्रीय तस्वीर सामने आती है। परिवारों द्वारा समझौता कर लेना, न्यायिक प्रक्रिया में देरी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कमजोरियां—इन सब कारणों से निर्दोष लोगों की हत्याएं ‘सम्मान’ के नाम पर जारी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सतत सामाजिक विकास संगठन (एसएसडीओ) की हालिया अध्ययन रिपोर्ट, जो आधिकारिक रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों पर आधारित है, बताती है कि कानून मौजूद होने के बावजूद कमजोर जांच, न्यायिक देरी और सामाजिक दबाव न्याय की राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक ऑनर किलिंग के मामले पंजाब प्रांत में दर्ज किए गए, जहां 225 घटनाएं सामने आईं, लेकिन केवल दो मामलों में सजा हो सकी। खैबर पख्तूनख्वा में 134 मामले दर्ज हुए, जिनमें सिर्फ दो में दोषसिद्धि हुई। सिंध में भी कई घटनाएं दर्ज की गईं, लेकिन किसी में भी सजा नहीं हो सकी। बलूचिस्तान में 32 मामले सामने आए, जिनमें सिर्फ एक में सजा हुई। ये आंकड़े जान गंवाने वालों की संख्या और न्याय मिलने के बीच बड़े अंतर को दर्शाते हैं।

महिला अधिकारों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता इमरान टक्कर ने बताया कि ऑनर किलिंग के करीब 90 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं होती हैं। उन्होंने कहा, “महिलाओं को पहले से ही समाज में कमजोर और उत्पीड़ित वर्ग माना जाता है। कई मामलों में परिवार ही पीछे हट जाते हैं। यदि पुलिस मजबूत केस तैयार करे, जांच बेहतर हो और अभियोजन पक्ष अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाए, तो कड़ी सजा संभव है।”

वरिष्ठ अधिवक्ता शब्बीर हुसैन गिगयानी ने कहा कि कानून और संशोधनों के बावजूद पुलिस की कमजोर जांच और केस निर्माण की खामियां न्याय में सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस अक्सर पीड़ित के करीबी रिश्तेदारों को ही शिकायतकर्ता और गवाह बना देती है, जो बाद में आरोपियों से समझौता कर लेते हैं। इसके चलते गवाह अदालत में बयान बदल देते हैं और लगभग 80 प्रतिशत मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं।

एसएसडीओ के कार्यकारी निदेशक सैयद कौसर अब्बास ने कहा कि बेहद कम दोषसिद्धि दर यह दर्शाती है कि पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था पीड़ितों को प्रभावी सुरक्षा और समय पर न्याय देने में विफल रही है। उन्होंने पुलिस जांच को मजबूत करने, कानूनी प्रक्रियाओं में सुधार और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारों की जरूरत पर जोर दिया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑनर किलिंग की जड़ें गहराई से जमी सामाजिक परंपराओं में हैं, जहां सामाजिक सीमाओं को चुनौती देने वालों को डर और हिंसा के जरिए चुप करा दिया जाता है। सख्त कानून लागू न होने की स्थिति में इन हत्याओं को ‘नैतिक सुधार’ के रूप में उचित ठहराया जाता है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित करना मुश्किल बना रहता है।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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