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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
मुंबई, 31 जनवरी (आईएएनएस)। जेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को बार-बार बढ़ाने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ज्यादा टैक्स लगाने से धीरे-धीरे शेयर बाजार में ट्रेडिंग गतिविधि कम हो रही है और इसका असर सरकार की कमाई पर भी पड़ रहा है।
एक सोशल मीडिया पोस्ट में नितिन कामथ ने बताया कि एसटीटी उस समय लागू किया गया था, जब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) हटा दिया गया था। लेकिन बाद में जब एलटीसीजी दोबारा लागू कर दिया गया, तब भी एसटीटी को हर बजट में बढ़ाया जाता रहा।
उन्होंने कहा कि बाजार में भागीदार होने के नाते उन्हें हर बजट से उम्मीद रहती है कि एसटीटी कम किया जाएगा, लेकिन हर साल यह बढ़ता ही जा रहा है।
नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, एक बाजार सहभागी के तौर पर मैं हमेशा उम्मीद करता हूं कि बजट में एसटीटी घटेगा, लेकिन यह हर साल बढ़ता जा रहा है। एसटीटी तब लाया गया था, जब एलटीसीजी शून्य कर दिया गया था, लेकिन अब एलटीसीजी वापस आ चुका है।
कामथ ने बजट 2024 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रेड पर एसटीटी में 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई थी।
उन्होंने बताया कि फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.0125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.02 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि ऑप्शंस पर टैक्स 0.0625 प्रतिशत से बढ़कर 0.1 प्रतिशत हो गया।
कामथ के अनुसार, उस समय बाजार तेजी में था, इसलिए एसटीटी बढ़ने का असर तुरंत नजर नहीं आया और ट्रेडिंग वॉल्यूम बना रहा।
उन्होंने कहा, बजट 2024 में एफएंडओ पर एसटीटी 60 प्रतिशत बढ़ाया गया था, लेकिन उस वक्त बुल मार्केट था और लोगों की भागीदारी बढ़ रही थी। मगर बाजार हमेशा तेजी में नहीं रहता।
पिछले एक साल में जब बाजार ठंडा पड़ा, तब ज्यादा एसटीटी का असर साफ दिखने लगा और ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने लगा।
कामथ ने वित्त वर्ष 2025-26 के एसटीटी कलेक्शन के सरकारी अनुमान पर भी सवाल उठाए। सरकार ने इस साल 78,000 करोड़ रुपए एसटीटी से जुटाने का लक्ष्य रखा था।
11 जनवरी तक एसटीटी से करीब 45,000 करोड़ रुपए ही जुट पाए थे। यदि मार्च के अंत तक 12,000 करोड़ रुपए और एकत्र हो जाते हैं, तब भी कुल कलेक्शन करीब 57,000 करोड़ रुपए रहेगा, जो लक्ष्य से लगभग 25 प्रतिशत कम है।
कामथ ने कहा कि मुझे लगता है कि अगर 2024 में एसटीटी नहीं बढ़ाया गया होता, तो सरकार को टैक्स के रूप में इससे कहीं ज्यादा रकम मिल सकती थी।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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